कोचिंग संस्थानों पर सीसीपीए की सख्त कार्रवाई: भ्रामक विज्ञापनों के लिए 15 लाख का जुर्माना
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने दिल्ली के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान ‘वाजीराव और रेड्डी इंस्टीट्यूट’ पर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के आरोप में 15 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उन विज्ञापनों को लेकर की गई है, जिनमें यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 के परिणामों को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
अप्रैल 2024 में यूपीएससी 2023 के नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद, इस कोचिंग संस्थान ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बड़े-बड़े दावे किए। संस्थान ने यह प्रचारित किया कि कुल 1,016 रिक्तियों में से 645 से अधिक चयनित उम्मीदवार उनके संस्थान से जुड़े हैं। इसमें यह भी बताया गया कि टॉप 10 में 6 और टॉप 50 में 35 छात्रों ने यहां से तैयारी की थी। इन दावों को नियमित कोर्स के विज्ञापनों के साथ इस तरह प्रस्तुत किया गया कि आम लोगों को लगा कि इन सभी सफल छात्रों ने प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार तीनों चरणों की पूरी तैयारी इसी संस्थान से की है।
सीसीपीए की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
सीसीपीए ने जब इस मामले की गहराई से जांच की तो सच्चाई सामने आई। संस्थान के नामांकन रिकॉर्ड की पड़ताल करने पर पता चला कि बड़ी संख्या में उन छात्रों ने, जिन्हें सफल बताकर विज्ञापन दिए गए थे, केवल ‘इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम’ या ‘मॉक इंटरव्यू’ के लिए ही पंजीकरण कराया था। इसका सीधा अर्थ यह है कि ये छात्र संस्थान से जुड़ने से पहले ही परीक्षा के दो सबसे कठिन चरणों को पार कर चुके थे। संस्थान ने उनके चयन का पूरा श्रेय अपने नियमित कोर्स को देकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया।
जांच में मिलीं और भी खामियां
प्राधिकरण की जांच में कई अन्य गड़बड़ियां भी सामने आईं। करीब 431 नामांकन फॉर्म ऐसे पाए गए जिनमें न तो कोर्स का नाम दर्ज था और न ही फॉर्म भरने की तारीख। संस्थान फीस की रसीद या अन्य पुष्टि करने वाले दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सका। सीसीपीए ने स्पष्ट किया कि पूरी जानकारी न देकर यह गलत धारणा बनाई गई कि सफल छात्रों ने पूरी पढ़ाई यहीं से की है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
यह पहली गलती नहीं
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इस संस्थान ने ऐसा किया हो। इससे पहले यूपीएससी 2022 के परिणामों के संदर्भ में भी इसी तरह के भ्रामक विज्ञापन देने पर संस्थान पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने की प्रवृत्ति को देखते हुए इस बार जुर्माने की राशि को बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया गया है।
प्राधिकरण की चिंता और भविष्य की कार्रवाई
सीसीपीए ने इस मामले में गहरी चिंता व्यक्त की है। प्राधिकरण का कहना है कि हर साल लगभग 11 लाख छात्र सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे भ्रामक विज्ञापनों के झांसे में आकर छात्र और उनके परिवार अपनी मेहनत की कमाई और अनमोल समय बर्बाद कर देते हैं। अब तक सीसीपीए देशभर के कोचिंग संस्थानों को भ्रामक विज्ञापनों और गलत व्यापारिक तरीकों के लिए 57 नोटिस जारी कर चुका है। इनमें से 29 संस्थानों पर कुल 1.24 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह की गलत प्रथाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।