दिल्ली विश्वविद्यालय: एसआरसीसी के ‘युगांतर’ कॉन्क्लेव में बोले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में आयोजित वार्षिक प्रबंधन कॉन्क्लेव ‘युगांतर’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने के लिए एक संप्रभु एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संप्रभु एआई की ओर भारत का कदम
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब तक केवल एआई का उपयोगकर्ता रहा है, लेकिन अब देश धीरे-धीरे संप्रभु एआई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन को अपनाने से डरना नहीं चाहिए, बल्कि इसे अवसर के रूप में देखना चाहिए। भारत ने ग्लोबल साउथ की जिम्मेदारी उठाई है और एआई शिखर सम्मेलन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दो दिवसीय इस कॉन्क्लेव का विषय ‘एआई फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड स्टार्टअप इनोवेशन’ रखा गया। शिक्षा मंत्री ने छात्रों को बड़े सपने देखने और नवाचार से प्रेरित होने के लिए प्रोत्साहित किया।
एसआरसीसी के शताब्दी वर्ष पर विशेष संबोधन
एसआरसीसी के शताब्दी वर्ष के अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कॉलेज को देश में वाणिज्य शिक्षा को आकार देने के 100 गौरवशाली वर्षों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि एसआरसीसी के पास शैक्षिक उत्कृष्टता की एक शानदार विरासत है। इस मौके पर उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों से मैकाले की औपनिवेशिक शिक्षा मानसिकता से मुक्त होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षण संस्थानों को अपने आप को नए युग के अनुरूप ढालना होगा। तकनीकी आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस युग में प्रतिस्पर्धा का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।
स्टार्टअप एक्सपो 2026 का अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने कॉलेज में आयोजित ‘विकसित भारत स्टार्टअप एक्सपो 2026’ का भी दौरा किया। इस एक्सपो में विद्यार्थियों द्वारा विकसित नवाचार प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए गए। मंत्री ने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को संप्रभु एआई पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा, ताकि दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सके। इसके लिए शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में निरंतर नवाचार और आत्मनिर्भरता जरूरी है।