जेईई मेंस 2026: ओडिशा के जुड़वा भाइयों ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड, दोनों के अंक हुए एक समान
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा-मुख्य (जेईई मेन) 2026 के पहले सत्र का परिणाम जारी कर दिया है। इस परीक्षा में देशभर से करीब 13.55 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 13.04 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए। यह आंकड़ा 96.26 प्रतिशत उपस्थिति दर्शाता है। परीक्षा का आयोजन 658 केंद्रों पर 326 शहरों में किया गया, जिसमें विदेशों के 15 शहर भी शामिल थे। यह कंप्यूटर आधारित परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित हुई, जिनमें अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगु प्रमुख रहीं।
100 पर्सेंटाइल पाने वालों की सूची
पेपर-1 (बीई/बीटेक) में कुल 12 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किया है। यह उपलब्धि उन्हें ऑल इंडिया रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाती है और जेईई एडवांस्ड के लिए पात्र बनाती है, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में प्रवेश का द्वार है। हालांकि, इस बार राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों के बीच एक अनोखी और प्रेरणादायक कहानी ने सबका ध्यान खींचा है।
जुड़वा भाइयों की अद्भुत उपलब्धि
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के रहने वाले जुड़वा भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान ने जेईई मेन के पहले सत्र में बिल्कुल समान अंक प्राप्त किए हैं। रैंकिंग पर आधारित इस प्रतियोगी परीक्षा में दोनों का स्कोर एक जैसा होना एक दुर्लभ घटना है, जिसने हर किसी को चौंका दिया है। दोनों भाइयों ने राजस्थान के कोटा शहर में रहकर इस परीक्षा की तैयारी की, जो देशभर में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग के लिए जाना जाता है।
तैयारी का तरीका और अनुशासन
महरूफ अहमद खान ने अपनी तैयारी के बारे में बताया कि उन्होंने अनुशासन और व्यवस्थित दिनचर्या के साथ पढ़ाई की। उनके अनुसार, शिक्षकों के मार्गदर्शन का पालन करना और नियमित अभ्यास करना उनकी सफलता का मुख्य आधार रहा। उन्होंने पिछले पांच वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी की और कोटा के वातावरण को अपनी मेहनत में सहायक बताया। वहीं, मसरूर अहमद खान ने स्वीकार किया कि तैयारी के दौरान छोटी-छोटी गलतियों के कारण कभी-कभी कम अंक आ जाते थे। ऐसे समय में वे अपने शिक्षकों से चर्चा करते थे और समाधान ढूंढते थे। उन्होंने एनसीईआरटी की पुस्तकों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों, परिवार और अपनी कड़ी मेहनत को दिया।
एक-दूसरे के सहारे मिली सफलता
दोनों भाइयों ने बताया कि वे शुरू से ही साथ पढ़ते रहे हैं। वे एक-दूसरे की शंकाओं का समाधान करते थे और जब परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते थे, तो एक-दूसरे को प्रेरित करते थे। इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ने उनके प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाने में मदद की। उनका मानना है कि भाई के साथ पढ़ने से न केवल विषयों की समझ बढ़ती है, बल्कि आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।
मां का त्याग और भविष्य के सपने
महरूफ ने यह भी बताया कि उनकी मां ने उनकी तैयारी के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और उनके साथ रहने का फैसला किया। इस त्याग ने उन्हें और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दी। आगे चलकर दोनों भाइयों का लक्ष्य जेईई एडवांस्ड में सफलता प्राप्त कर आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना है। इसके अलावा, महरूफ ने भविष्य में सिविल सेवा में जाने की भी इच्छा जताई, जो उनके व्यापक दृष्टिकोण और देशसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
- परीक्षा में कुल 13,55,293 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था।
- 13,04,653 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए।
- उपस्थिति प्रतिशत 96.26% रहा।
- 12 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किया।
- परीक्षा 658 केंद्रों पर 326 शहरों में आयोजित हुई।