मेघालय के नौवीं कक्षा के छात्र ने गैस रिसाव रोकने के लिए बनाया स्मार्ट उपकरण, जूरी पुरस्कार से हुए सम्मानित

मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में एक सरकारी स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र ने अपनी वैज्ञानिक सोच और नवाचार से सबको चौंका दिया है। इस छात्र ने एक ऐसी स्मार्ट प्रणाली विकसित की है जो गैस रिसाव का तुरंत पता लगाकर संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में सक्षम है। इस उपलब्धि के लिए उसे उत्तर पूर्व विज्ञान मेले और नवाचार महोत्सव में प्रतिष्ठित जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

मावंगाप जिला क्रिश्चियन मल्टीपर्पस एचएस स्कूल के छात्र जेम्स डोनाल्ड खारकोंगोर ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार गुवाहाटी स्थित राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कार्यक्रम में प्राप्त किया। यह केंद्र राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की एक इकाई है। लैतप्यंटर सिनरंगकबन गांव के रहने वाले जेम्स के पिता एक स्कूल शिक्षक हैं और मां गृहिणी हैं।

स्मार्ट गैस सुरक्षा प्रणाली को मिली मान्यता

जेम्स ने अपने नवाचार के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए बताया कि वह राष्ट्र निर्माण में अपने विचारों का योगदान देना चाहते हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह पुरस्कार परियोजना की व्यावहारिक उपयोगिता, तकनीकी एकीकरण और समाज पर इसके संभावित सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए प्रदान किया गया है।

यह स्मार्ट एलपीजी सुरक्षा और जोखिम निवारण प्रणाली उन्नत गैस सेंसरों का उपयोग करके हवा की गुणवत्ता पर लगातार नज़र रखती है। जैसे ही गैस की सांद्रता सुरक्षित सीमा से अधिक होती है, यह तुरंत बजर अलार्म सक्रिय कर देती है। साथ ही, एक स्वचालित निकास पंखा चालू हो जाता है जो एकत्रित गैस को बाहर फैलाने का काम करता है, जिससे आग लगने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

गैस रिसाव रोकने में उन्नत तकनीक का उपयोग

इस उपकरण की सबसे खास विशेषता स्वचालित सोलेनोइड वाल्व है। जैसे ही रिसाव का पता चलता है, यह वाल्व गैस की आपूर्ति को तुरंत बंद कर देता है। इससे आगे गैस का रिसाव रुक जाता है और आग या विस्फोट जैसी बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह प्रणाली इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित अलर्ट से भी जुड़ी हुई है। इसकी मदद से दूर से ही निगरानी की जा सकती है और वास्तविक समय में सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं। शिलांग विज्ञान केंद्र का इनोवेशन हब जेम्स को लगातार मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है, जहां उसे व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और वैज्ञानिक मंचों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।