डिजिटल युग में सुरक्षा: राष्ट्रपति मुर्मू का साइबर जागरूकता पर बल
देश में तेजी से बढ़ रही साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को गहरी चिंता में डाल दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना समय की मुख्य आवश्यकता है। उनका मानना है कि स्कूली पाठ्यक्रम में इन विषयों को शामिल करके बच्चों को कम उम्र से ही तकनीक के सही और सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक किया जा सकता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने ओडिशा सरकार और ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क (GFTN) के सहयोग से आयोजित ‘ब्लैक स्वान समिट’ में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी में देश के हर वर्ग को सशक्त बनाने की अपार क्षमता है, लेकिन इसका दुरुपयोग ऑनलाइन और वित्तीय धोखाधड़ी के रूप में भी हो रहा है, जो लोगों की जीवनभर की कमाई को लील रहा है और उन्हें मानसिक तथा सामाजिक संकट में डाल रहा है।
डिजिटल शिक्षा: साइबर जोखिमों से बचाव का सबसे मजबूत हथियार
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए केवल कानूनी कदम ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए आम नागरिकों में जागरूकता पैदा करना और उन्हें सतर्क रहना सिखाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा, “डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे बच्चे शुरुआत से ही तकनीक के लाभ और संभावित खतरों दोनों को समझ सकेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां तकनीक अभूतपूर्व गति से बदल रही है। नए-नए आविष्कार इतनी तेजी से सामने आ रहे हैं कि हमारी मौजूदा प्रणालियां और कौशल उनके साथ तालमेल बिठाने में पीछे रह जाते हैं। इस तीव्र प्रगति के साथ साइबर सुरक्षा खतरे, डीपफेक, गलत सूचना और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता जैसी गंभीर चुनौतियां भी आती हैं।
सरकार की तैयारी और तकनीकी चुनौतियां
राष्ट्रपति मुर्मू ने सरकार द्वारा डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इस दिशा में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्रणाली और साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थान स्थापित किए गए हैं। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे डिजिटल और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए मिलकर काम करें, ताकि आम लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी से बच सकें।
फिनटेक में महिलाओं की भागीदारी और समावेशन
राष्ट्रपति ने पिछले दस वर्षों में भारत की वित्तीय व्यवस्था में आए बड़े बदलावों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज किसान, छोटे दुकानदार और महिलाएं आसानी से बैंक खातों का उपयोग कर रहे हैं और डिजिटल भुगतान उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। फिनटेक अब केवल एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि एक रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है।
महिलाओं में वित्तीय साक्षरता के प्रसार पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा, “महिलाएं एक महत्वपूर्ण वर्ग हैं, जिन पर फिनटेक को बढ़ावा देने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। फिनटेक इकोसिस्टम को उन्हें केवल अंतिम उपयोगकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि नेताओं, पेशेवरों और उद्यमियों के रूप में भी देखना चाहिए।” उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि जब भी कोई नया डिजिटल प्लेटफॉर्म, उत्पाद या नीति बनाई जाए, तो यह जांचा जाना चाहिए कि वह महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय व्यवस्था में सक्रिय रूप से शामिल कर रही है या नहीं।
दूरदराज के क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि केवल फिनटेक के होने मात्र से सबका विकास स्वतः नहीं हो जाता। आज भी दूर-दराज, आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोग डिजिटल उपकरणों का सही उपयोग नहीं जानते। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को डिजिटल कौशल प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने उद्यमियों और नवप्रवर्तकों से अपील की कि वे तकनीक को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का माध्यम बनाएं, न कि केवल मुनाफे का साधन।