एम्स शोध दिवस: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर केंद्रित नवाचार और उपलब्धियां
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने हाल ही में ‘एम्स शोध दिवस 2026’ का आयोजन किया, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थान की शोध उपलब्धियों को प्रदर्शित करना और युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करना था।
एम्स के निदेशक प्रो. एम. श्रीनिवास ने इस अवसर पर कहा कि यह दिन शोध को देश की स्वास्थ्य आवश्यकताओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में संस्थान में 1,000 से अधिक वित्तपोषित परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शामिल है। यह एम्स की शोध क्षमता और राष्ट्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
शोध में वैश्विक पहचान और एआई की भूमिका
गौरतलब है कि एम्स के 57 वैज्ञानिक दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत शोधकर्ताओं की सूची में शामिल हैं, जो संस्थान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन के डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एआई कैसे निदान, उपचार योजना और रोग निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
टेलीरोबोटिक अल्ट्रासाउंड: एक क्रांतिकारी प्रदर्शन
इस शोध दिवस का सबसे आकर्षक पहलू टेलीरोबोटिक अल्ट्रासाउंड तकनीक का लाइव प्रदर्शन था। यह अभिनव तकनीक एम्स और आईआईटी दिल्ली के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इस प्रणाली की मदद से चिकित्सक हजारों किलोमीटर दूर बैठकर भी रोबोटिक हाथ की सहायता से वास्तविक समय में अल्ट्रासाउंड जांच कर सकते हैं।
यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इसके जरिए पेट, हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित जांचें दूर से ही सटीकता से की जा सकती हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और समय पर निदान संभव हो सकेगा।
- शोध दिवस का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप अनुसंधान को बढ़ावा देना था।
- एम्स में चल रही 1,000 से अधिक शोध परियोजनाओं में कुल 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश है।
- टेलीरोबोटिक अल्ट्रासाउंड जैसे नवाचार दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मददगार साबित होंगे।
- कार्यक्रम में युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और उनके कार्यों को मान्यता देने पर विशेष बल दिया गया।