सीबीएसई स्कूलों में अब काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य: मानसिक स्वास्थ्य और करियर मार्गदर्शन पर विशेष जोर
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और उन्हें उचित करियर दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब बोर्ड से संबद्ध सभी विद्यालयों में सोशियो-इमोशनल काउंसलर और करियर काउंसलर की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था 19 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुकी है।
निर्णय के पीछे की वजह
यह बदलाव सीबीएसई के एफिलिएशन बायलॉज 2018 के क्लॉज 2.4.12 में किए गए संशोधन के तहत लागू किया गया है। इस फैसले की पृष्ठभूमि में राजस्थान हाईकोर्ट में जुलाई 2025 में दायर एक जनहित याचिका प्रमुख रूप से शामिल है। यह याचिका कोटा के वकील सुजीत स्वामी और कुछ मनोविज्ञान विशेषज्ञों द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें स्कूली शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य और मार्गदर्शन की कमी को उजागर किया गया था।
याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
याचिका में स्पष्ट रूप से बताया गया कि बढ़ती शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा और पढ़ाई के दबाव के कारण छात्र गंभीर तनाव, चिंता और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है और न ही छात्रों को व्यवस्थित करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि सभी स्कूलों में प्रशिक्षित और योग्य काउंसलरों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों को एक समान और प्रभावी मानसिक सहायता प्रणाली मिल सके।
हाईकोर्ट की सुनवाई और सीबीएसई का निर्णय
सितंबर 2025 में इस मामले की सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीबीएसई, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और राज्य सरकार से उनके विचार और सुझाव मांगे थे। सभी पक्षों की राय और सुझावों पर गहन विचार-विमर्श के बाद, सीबीएसई ने 19 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक परिपत्र जारी कर नियमों में आवश्यक संशोधन लागू कर दिए।
नए नियमों में शामिल प्रमुख बदलाव
सीबीएसई ने क्लॉज 2.4.12 में दो नए उप-खंड जोड़े हैं, जिनके तहत निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
- काउंसलिंग और वेलनेस टीचर अनिवार्य: अब प्रत्येक सीबीएसई स्कूल में प्रति 500 छात्रों पर एक नियमित काउंसलिंग और वेलनेस टीचर (सोशियो-इमोशनल काउंसलर) की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा।
- करियर काउंसलर की नियुक्ति: सभी संबद्ध स्कूलों में एक करियर काउंसलर रखना अनिवार्य होगा, जो छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार सही विषय, पाठ्यक्रम और करियर विकल्प चुनने में मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
गौरतलब है कि पहले के नियमों के अनुसार केवल उन्हीं स्कूलों में पूर्णकालिक मनोवैज्ञानिक काउंसलर रखना अनिवार्य था, जहां कक्षा 9 से 12 तक 300 से अधिक छात्र होते थे। छोटे स्कूलों के लिए अंशकालिक काउंसलर की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अब इस नियम में व्यापक बदलाव किया गया है।
काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के लिए योग्यता
काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के पद के लिए निम्नलिखित योग्यताएं अनिवार्य की गई हैं:
- मनोविज्ञान में स्नातक या परास्नातक डिग्री, या सोशल वर्क में परास्नातक डिग्री जिसमें मानसिक स्वास्थ्य या काउंसलिंग में विशेषज्ञता हो।
- सीबीएसई द्वारा मान्यता प्राप्त 50 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करना अनिवार्य होगा।
काउंसलर की प्रमुख जिम्मेदारियां
- छात्रों और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग करना।
- बच्चों में सामाजिक और भावनात्मक समझ का विकास करना।
- मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं की पहचान करना और उनका समाधान करना।
- आपातकालीन स्थितियों में तत्काल सहायता प्रदान करना।
- शिक्षकों और अभिभावकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना।
- गोपनीयता और नैतिक मानकों का कड़ाई से पालन करना।
छोटे स्कूलों के लिए विशेष मॉडल
छोटे और संसाधनों की कमी वाले स्कूलों को ध्यान में रखते हुए, सीबीएसई ने ‘काउंसलिंग हब और स्पोक मॉडल’ लागू किया है। इस मॉडल के तहत, बड़े स्कूल (हब) अपने आसपास के छोटे स्कूलों (स्पोक) को काउंसलिंग सेवाएं प्रदान करने में सहयोग करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि संसाधनों की कमी के बावजूद हर छात्र तक मानसिक स्वास्थ्य और मार्गदर्शन सेवाएं पहुंच सकें।
करियर काउंसलर के लिए नियम और योग्यता
कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए प्रति 500 छात्रों पर एक करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इस पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता में मानविकी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन, शिक्षा या प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में स्नातक या परास्नातक डिग्री शामिल है।
याचिकाकर्ताओं और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
इस फैसले का स्वागत करते हुए याचिकाकर्ता वकील सुजीत स्वामी ने कहा कि इस याचिका का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक के सभी छात्रों की मानसिक आवश्यकताओं को पूरा करना था। उन्होंने विशेष रूप से कक्षा 10 के बाद छात्रों को विशेषज्ञ करियर मार्गदर्शन की आवश्यकता पर बल दिया था। अब जब सीबीएसई ने ये बदलाव लागू कर दिए हैं, तो उम्मीद है कि राजस्थान बोर्ड से जुड़े स्कूलों में भी इसी प्रकार के सुधार जल्द ही देखने को मिलेंगे।
राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता अमित दाधीच ने इस निर्णय को एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के छात्रों के लिए भी एक मजबूत मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के प्रयास न्यायालय में जारी हैं, जिसके जल्द ही ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं।