सरकारी नियुक्तियों में बड़ा उछाल: 11 साल में 20 लाख से अधिक पदोन्नतियां स्वीकृत

केंद्र सरकार ने पिछले 11 वर्षों में सरकारी नौकरियों और पदोन्नतियों के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में जानकारी दी कि इस दौरान 20 लाख से अधिक लंबित पदोन्नतियों को मंजूरी दी गई है, जिससे सरकारी कर्मचारियों के करियर में एक बड़ा बदलाव आया है। इसके साथ ही, सरकारी भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कई अहम सुधार भी लागू किए गए हैं।

भर्ती प्रक्रिया में रिकॉर्ड वृद्धि

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार की तीन प्रमुख भर्ती एजेंसियों — संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC) और रेलवे भर्ती बोर्ड — के माध्यम से नियुक्तियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि 2014 से अब तक इन तीनों एजेंसियों ने मिलकर लगभग 10.96 लाख नियुक्तियां की हैं, जो पिछले दशक की तुलना में डेढ़ गुना अधिक है।

गौरतलब है कि 2004 से 2014 के बीच इन्हीं एजेंसियों के जरिए कुल 7.22 लाख नियुक्तियां ही हो पाई थीं। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पिछले एक दशक में सरकारी भर्तियों की गति में कितनी तेजी आई है।

आरक्षित वर्गों के लिए बेहतर अवसर

आरक्षित वर्गों की बैकलॉग रिक्तियों को भरने पर विशेष जोर दिया गया है। मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि पहले जहां इन वर्गों के लिए केवल 1.08 लाख नियुक्तियां हुई थीं, वहीं पिछले 11 वर्षों में यह संख्या लगभग चार गुना बढ़कर 4.79 लाख तक पहुंच गई है। इससे सरकारी नौकरियों में देरी और असमानता जैसी पुरानी समस्याओं को दूर करने में काफी मदद मिली है।

लंबित पदोन्नतियों का समाधान

सरकारी कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि पिछले 11 वर्षों में 20 लाख से अधिक लंबित पदोन्नतियों को मंजूरी दी गई। इस कदम से वह स्थिति समाप्त हुई है, जहां कई कर्मचारियों को अपने पूरे करियर में एक ही पद पर रहकर सेवानिवृत्त होना पड़ता था।

मंत्री ने कहा कि पदोन्नतियों की इस स्वीकृति ने सरकार के मानव संसाधन प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव लाया है। तेज भर्ती प्रक्रिया और बढ़ी हुई पारदर्शिता ने कर्मचारियों के करियर में आगे बढ़ने की राह में आने वाली पुरानी बाधाओं को दूर किया है।

रोजगार मेले की सफलता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए रोजगार मेला कार्यक्रम ने भी भर्ती प्रक्रिया को नई दिशा दी है। इसके 18वें संस्करण में एक साथ 61,000 से अधिक नियुक्ति पत्र जारी किए गए। इनमें से 49,225 नियुक्तियां गृह मंत्रालय और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से संबंधित हैं।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। मंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में नीतिगत बदलावों के चलते महिला कांस्टेबलों की संख्या में वृद्धि हुई है। अब सीमा सुरक्षा बल में महिलाओं को सीमा की जीरो लाइन तक तैनात किया जा रहा है।

एक ऐतिहासिक कदम के तहत, आगामी 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार एक महिला सहायक कमांडेंट, पूरी तरह पुरुषों की सीआरपीएफ टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

भर्ती सुधारों पर विशेष जोर

भर्ती प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधार लागू किए गए हैं। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने एक नया डिजिटल पोर्टल शुरू किया है, जिसके जरिए उम्मीदवार अपनी पसंद का परीक्षा केंद्र और तारीख चुन सकते हैं। साथ ही, वे उत्तर कुंजी देख सकते हैं और ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।

वहीं, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आधार और डिजिलॉकर से जुड़ा एक एकीकृत वन-टाइम रजिस्ट्रेशन सिस्टम शुरू किया है। दिव्यांग उम्मीदवारों को देशभर में अपनी पसंद के परीक्षा केंद्र की गारंटी भी दी गई है, जिससे उनके लिए भागीदारी आसान हुई है।

प्रतिभा सेतु पहल

मंत्री ने ‘प्रतिभा सेतु’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसके तहत अंतिम परीक्षा पास करने के बाद भी नियुक्ति न पाने वाले उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के अनुसार अन्य रोजगार अवसरों से जोड़ा जाता है। यह पहल प्रतिभाओं को बर्बाद होने से बचाने में मददगार साबित हो रही है।

एसटी वर्ग को मिली प्राथमिकता

अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की भागीदारी पर बात करते हुए मंत्री ने बताया कि हालिया रोजगार मेले में लगभग 14.6 प्रतिशत नियुक्तियां एसटी वर्ग से हुई हैं, जो निर्धारित आरक्षण से लगभग दोगुनी है। यह आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत है।

स्टार्टअप और अन्य योजनाओं से रोजगार सृजन

रोजगार सृजन से जुड़ी अन्य योजनाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया के तहत 2.08 लाख से अधिक स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जिससे 21 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना से 70 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी वालों को लाभ मिला है। वहीं, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत पारंपरिक कौशल से जुड़े 2.72 करोड़ से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराकर अपनी आजीविका बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है।

भविष्य की दिशा

मंत्री ने कहा कि रोजगार मेला की सफलता से अब कई राज्य सरकारें भी इसी तरह की पहल शुरू कर रही हैं। सरकार की नीतियां विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं। आज नियुक्ति पत्र पाने वाले युवा वर्ष 2047 में, जब भारत आजादी के 100 साल पूरे करेगा, अपने करियर के शिखर पर होंगे और देश के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे।