आईआईटी कानपुर में छात्र आत्महत्याओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित

केंद्र सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में हाल के दिनों में घटित छात्र आत्महत्याओं के मामलों को गंभीरता से लेते हुए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति इन घटनाओं के कारणों की गहन समीक्षा करेगी और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय सुझाएगी। समिति को अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

सरकार द्वारा यह कदम तब उठाया गया है जब आईआईटी कानपुर में पिछले एक महीने से भी कम समय में दो छात्रों ने आत्महत्या कर ली। इन घटनाओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन से जुड़ी चिंताओं को फिर से उजागर कर दिया है। सरकार का मानना है कि यह समिति न केवल आईआईटी कानपुर बल्कि देशभर के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मजबूत करने में सहायक होगी।

समिति की संरचना और कार्यक्षेत्र

गठित समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (NETF) के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे करेंगे। समिति में वरिष्ठ मनोचिकित्सक जितेंद्र नागपाल और उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह समिति निम्नलिखित बिंदुओं पर काम करेगी:

  • हाल ही में हुई छात्र आत्महत्याओं के पीछे के कारणों का विश्लेषण करना।
  • जुलाई 2023 में जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की भावनात्मक और मानसिक भलाई के लिए बनाए गए फ्रेमवर्क दिशानिर्देशों के साथ आईआईटी कानपुर के अनुपालन की समीक्षा करना।
  • संस्थान में उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली और परामर्श सेवाओं की जांच करना।
  • छात्रों के लिए बेहतर परामर्श और सहयोग तंत्र विकसित करने के लिए ठोस सिफारिशें प्रस्तुत करना।

पिछले एक महीने में दो दुखद घटनाएं

आईआईटी कानपुर में पिछले एक महीने के भीतर आत्महत्या की दो घटनाएं सामने आई हैं। पहली घटना 29 दिसंबर की है, जब जीव विज्ञान और जैव इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के बीटेक छात्र, 26 वर्षीय जय सिंह मीना, अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए थे। इसके कुछ ही दिनों बाद, मंगलवार को पीएचडी छात्र रामस्वरूप ईश्वरम (25) ने कैंपस में स्थित एक आवासीय भवन की छठी मंजिल से कथित तौर पर कूदकर अपनी जान दे दी।

इन घटनाओं ने शैक्षणिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसे मुद्दों पर गंभीर बहस छेड़ दी है। कई छात्र संगठनों और अभिभावकों ने संस्थान से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की मांग की है।

समिति की रिपोर्ट का महत्व

समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में आत्महत्या के कारणों का विस्तृत विश्लेषण, संस्थान में वर्तमान मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था की समीक्षा और छात्रों के लिए बेहतर परामर्श एवं सहयोग तंत्र विकसित करने से जुड़े सुझाव शामिल होंगे। सरकार को उम्मीद है कि यह रिपोर्ट भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और छात्रों के कल्याण को सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी।

गौरतलब है कि पिछले पांच वर्षों में देशभर के आईआईटी में 65 से अधिक छात्र आत्महत्याओं के शिकार हो चुके हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले आईआईटी कानपुर में दर्ज किए गए हैं। इस पृष्ठभूमि में सरकार की यह पहल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।