भारतीय ज्ञान प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में जामिया की पहल

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने अंग्रेजी से हिंदी में सामाजिक विज्ञान की शिक्षार्थी शब्दावली विकसित करने के लिए आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन किया। यह कार्यशाला शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग (सीएसटीटी) और जामिया के राजनीति विज्ञान विभाग के सहयोग से आयोजित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में सामाजिक विज्ञान से जुड़ी शब्दावली को और अधिक मजबूत बनाना था।

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की आवश्यकता

समापन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों को ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ को त्यागना होगा और भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) को शिक्षा के केंद्र में रखना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिकता की झूठी भावना ने हमारे मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इस स्थिति को सुधारने के लिए हमें अपनी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को प्राथमिकता देनी होगी। कुलपति ने स्पष्ट किया कि अनुवाद केवल शब्दों को बदलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न भारतीय भाषाओं के अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भ को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

गहन अनुवाद और सांस्कृतिक संदर्भ पर बल

इस कार्यशाला में देशभर के विद्वानों ने भाग लिया और सामाजिक विज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण शब्दों का सरल तथा उपयुक्त अनुवाद किया। यह सुनिश्चित किया गया कि ये अनुवाद भारतीय इतिहास, भूगोल और संस्कृति को सटीक रूप से दर्शाएं। कुलपति ने अपने अनुवादक और भाषाविज्ञानी के अनुभव को साझा करते हुए टीम को शाब्दिक अनुवाद की सीमाओं से सावधान रहने का सुझाव दिया। उन्होंने शब्दावली तैयार करने वाले 13 सदस्यीय विशेषज्ञ समूह के प्रयासों की सराहना की।

गांधी और भारतेंदु के विचारों से प्रेरणा

कार्यशाला के समन्वयक प्रोफेसर नावेद जमाल ने इस प्रयास की ऐतिहासिक जड़ों को रेखांकित किया। उन्होंने महात्मा गांधी के हिंदी और हिंदुस्तानी के प्रचार के प्रयासों तथा भारतेंदु हरिश्चंद्र के अपनी भाषा में बौद्धिक विकास के आह्वान को याद किया। इसके अलावा, उन्होंने प्रख्यात भौतिक विज्ञानी और शिक्षाविद प्रोफेसर डी.एस. कोठारी के योगदान का भी उल्लेख किया, जिन्होंने एक समय सीएसटीटी की अध्यक्षता संभाली थी। भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने और ज्ञान को अधिक सुलभ बनाने की यह पहल जामिया मिल्लिया इस्लामिया की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।