बच्चों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित ‘रक्षा’ टूल लॉन्च

बच्चों को तस्करी, बाल विवाह और यौन शोषण जैसे अपराधों से बचाने के लिए एक नया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरण ‘रक्षा’ पेश किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने ‘प्रॉस्पेरिटी फ्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट’ में इस टूल का अनावरण किया। यह पहल बाल संरक्षण के क्षेत्र में तकनीकी हस्तक्षेप को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।

कैसे काम करेगा ‘रक्षा’ टूल?

गैर-सरकारी संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन द्वारा विकसित यह टूल देशभर में 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क के साथ काम करता है, जो 451 जिलों में फैला हुआ है। ‘रक्षा’ बच्चों से जुड़े डेटा का गहन विश्लेषण करके संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करता है। यह उन बच्चों और समुदायों को चिन्हित करता है जो जोखिम में हैं, साथ ही तस्करी गिरोहों पर नज़र रखने और शोषण के नए पैटर्न का पता लगाने में सहायता करता है।

केंद्रीय मंत्री का बयान

लॉन्चिंग के अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्य तब सामने आता है जब इसका उपयोग बच्चों की सुरक्षा के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें एक सुरक्षित और सशक्त डिजिटल वातावरण प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री ने ‘रक्षा’ को बाल संरक्षण और सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो एक मजबूत बाल संरक्षण प्रणाली बनाने में मदद करेगा और सभी हितधारकों को एक मंच पर लाएगा।

तीन स्तरों पर सुरक्षा

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बताया कि ‘रक्षा’ टूल भारत में बाल संरक्षण के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सक्षम है। यह उपकरण तीन प्रमुख तरीकों से काम करता है:

  • आर्थिक असुरक्षा कम करना: परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाकर बाल विवाह को रोकने में मदद करता है।
  • अपराध की जड़ों की पहचान: तस्करी और संगठित अपराध के मूल कारणों का पता लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास करता है।
  • डिजिटल सुरक्षा: ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री की पहचान, विश्लेषण और मानचित्रण करके डिजिटल बाल संरक्षण को सशक्त बनाता है।

यह टूल पूर्वानुमान आधारित रोकथाम, संवेदनशील परिवारों की निगरानी और ऑनलाइन दुर्व्यवहार सामग्री का पता लगाने में सक्षम है। सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि एआई न केवल डेटा प्रदान करता है, बल्कि मानवीय निर्णय क्षमता को बढ़ाता है और नुकसान होने से पहले हस्तक्षेप करना संभव बनाता है।

पिछले वर्षों की उपलब्धियां

नीति आयोग के सहयोग से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने वर्ष 2025 में 20 लाख परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा। इस प्रयास से 1,98,628 बाल विवाह रोके गए और 55,146 बच्चों को शोषण से मुक्त कराया गया। इस टूल की मदद से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर 73,258 मामलों का समाधान किया गया। साथ ही, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के साथ साझेदारी कर बच्चों की तस्करी को रोकने में भी सफलता मिली।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026

यह टूल इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले लॉन्च किया गया है, जो 16 से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित होगा। यह वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) में अपनी तरह का पहला आयोजन होगा, जिसमें दुनिया भर के नेता, नीति निर्माता और प्रमुख कंपनियों के सीईओ एआई के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। इस सम्मेलन में भारत की बढ़ती भूमिका और एआई के क्षेत्र में देश की प्रगति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।