बंगाल एसएससी घोटाला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने दागी उम्मीदवारों की विस्तृत सूची जारी करने का दिया आदेश
कोलकाता। पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) को कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने आयोग को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि वह उन 1806 दागी उम्मीदवारों की पूरी जानकारी के साथ एक नई सूची अदालत के समक्ष पेश करे, जिनकी नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रद्द की जा चुकी हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को तय की गई है।
अदालत ने उठाए सवाल
न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने एसएससी द्वारा पहले दाखिल की गई रिपोर्ट को अपर्याप्त बताया। अदालत ने कहा कि मौजूदा रिपोर्ट में उम्मीदवारों के रोल नंबर, नाम, विषय, अभिभावक का नाम और जन्मतिथि जैसी बुनियादी जानकारी तो मौजूद है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ये उम्मीदवार किस श्रेणी में दागी पाए गए। इसके अलावा, सूची में यह भी दर्ज नहीं है कि इन उम्मीदवारों को 2016 की पहली स्कूल-स्तरीय चयन परीक्षा के तहत किस स्कूल और किस जिले में नियुक्त किया गया था।
पारदर्शिता पर जोर
न्यायमूर्ति सिन्हा ने साफ किया कि एसएससी को ऐसी विस्तृत सूची प्रकाशित करनी चाहिए, जिससे दागी उम्मीदवारों की स्पष्ट पहचान हो सके। अदालत ने चिंता जताई कि अगर पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, तो इन दागी उम्मीदवारों के नई भर्ती प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने की आशंका बनी रहेगी। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि 19 नवंबर 2025 के पिछले आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि दागी उम्मीदवारों की सूची का उद्देश्य केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनकी सटीक पहचान सुनिश्चित करना है।
एसएससी की तैयारी
एसएससी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि आयोग ने नई और विस्तृत सूची प्रकाशित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गौरतलब है कि एसएससी इस समय दूसरी एसएलएसटी 2025 के माध्यम से पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में नई भर्तियां कर रहा है।
पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला भर्ती प्रक्रिया में हुई गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं। अदालत ने इन नियुक्तियों को अवैध करार देते हुए कहा था कि भर्ती प्रक्रिया में धांधली हुई है। अब कोर्ट चाहता है कि दागी उम्मीदवारों की पूरी जानकारी सार्वजनिक हो, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो सके।