सुप्रीम कोर्ट ने CLAT 2026 पेपर लीक मामले में जांच की मांग वाली याचिका की खारिज

उच्चतम न्यायालय ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) 2026 में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली एक याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका दाखिल करने में देरी को लेकर कड़ा सवाल उठाया और कहा कि परीक्षा पूरी हो जाने के बाद इस स्तर पर हस्तक्षेप करना संभव नहीं है।

अदालत ने देरी पर उठाए सवाल

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि जब कथित रूप से 6 दिसंबर को प्रश्नपत्र लीक हुआ था, तो याचिका 16 दिसंबर को ही क्यों दायर की गई। पीठ ने स्पष्ट कहा, “अगर परिणाम घोषित होने से पहले याचिका आती, तो अदालत इस पर विचार कर सकती थी।” याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता मालविका कपिला ने तर्क दिया कि याचिका समय पर दाखिल की गई थी और वे परीक्षा दोबारा कराने की मांग नहीं कर रहे हैं। इसके बावजूद, शीर्ष अदालत ने इसे सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया।

याचिका में क्या थे आरोप?

यह याचिका कानून की पढ़ाई करने के इच्छुक कुछ अभ्यर्थियों ने दायर की थी। उनका दावा था कि परीक्षा से पहले व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी से संबंधित वीडियो और तस्वीरें प्रसारित हो रही थीं। याचिका के अनुसार, ये सामग्री परीक्षा से पहले ही अवैध रूप से साझा की गई थी।

  • याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ स्क्रीनशॉट और वीडियो 6 दिसंबर की रात करीब 10:15 बजे के टाइमस्टैम्प दिखा रहे थे, जो परीक्षा शुरू होने से लगभग 15 घंटे पहले लीक होने का संकेत देते हैं।
  • कुछ संदेशों में पैसे लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की पेशकश भी की गई थी।
  • याचिका में कहा गया कि टेलीग्राम पर साझा किए गए संदेशों पर ‘edited’ का कोई संकेत नहीं था, जिससे ये सामग्री वास्तविक प्रतीत होती है।
  • अभ्यर्थियों के अनुसार, इससे परीक्षा की निष्पक्षता और समान अवसर की भावना को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

परीक्षा का आयोजन और इसका महत्व

CLAT 2026 का आयोजन 7 दिसंबर 2025 को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक किया गया था। यह परीक्षा देश के 25 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 156 केंद्रों पर आयोजित हुई। इस परीक्षा के माध्यम से 25 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में स्नातक और परास्नातक स्तर के कानून पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। इस बार लगभग 92 हजार से अधिक छात्रों ने करीब 5,000 सीटों के लिए आवेदन किया था।

काउंसलिंग प्रक्रिया और चिंताएं

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया 7 जनवरी से शुरू होनी थी। याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई कि यदि मौजूदा परिणामों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो योग्य उम्मीदवारों को अपूरणीय क्षति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि कंसोर्टियम ने पूर्व न्यायाधीश एमआर शाह की अध्यक्षता में एक शिकायत निवारण पोर्टल बनाया था, लेकिन अब तक कोई जांच रिपोर्ट या स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया। उनके अनुसार, इससे अभ्यर्थियों के बीच अविश्वास बढ़ा है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी दलीलों पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा पूरी होने के बाद अब इस स्तर पर कोई हस्तक्षेप संभव नहीं है।