असम सरकार की बाबू असोनी योजना: पुरुष छात्रों को मिलेगा मासिक वित्तीय सहयोग

असम सरकार ने उच्च शिक्षा में पढ़ रहे पुरुष छात्रों के लिए एक नई योजना ‘बाबू असोनी’ की शुरुआत की घोषणा की है। इस योजना के तहत स्नातक और परास्नातक स्तर के छात्रों को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी और पात्र छात्रों के बैंक खातों में सीधे राशि हस्तांतरित की जाएगी।

योजना के तहत कितनी मिलेगी सहायता?

बाबू असोनी योजना के अंतर्गत छात्रों को उनकी शैक्षणिक स्तर के अनुसार अलग-अलग राशि दी जाएगी:

  • स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों में नामांकित पुरुष छात्रों को प्रति माह 1000 रुपये
  • परास्नातक (PG) पाठ्यक्रमों में नामांकित पुरुष छात्रों को प्रति माह 2000 रुपये

यह सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाएगी, जिससे बिचौलियों की कोई आवश्यकता नहीं रहेगी।

पात्रता के लिए क्या शर्तें हैं?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए छात्रों को कुछ मापदंडों पर खरा उतरना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, योजना की मुख्य पात्रता शर्तें इस प्रकार हैं:

  • आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 4 लाख रुपये से कम होनी चाहिए
  • सरकारी कर्मचारी के पुत्र इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे
  • 4 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों के छात्र भी इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे

योजना के पीछे सरकार का उद्देश्य

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह स्पष्ट किया कि यह योजना पुरुष छात्रों से किए गए एक पुराने वादे को पूरा करती है। सरकार का मानना है कि आर्थिक दबाव कम होने से छात्र अपनी पढ़ाई पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। लोकसभा में 2023-24 के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, असम में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर 14.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। ऐसे में सरकार शिक्षा और कौशल विकास में निवेश को रोजगार के अवसर बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम मानती है।

मौजूदा योजनाओं का विस्तार

बाबू असोनी योजना को असम सरकार की उन पहलों का विस्तार माना जा रहा है जो अब तक मुख्य रूप से छात्राओं पर केंद्रित थीं। ‘निजुत मोइना’ योजना के माध्यम से बालिकाओं को उच्च माध्यमिक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप नामांकन दर में वृद्धि हुई है और बाल विवाह के मामलों में कमी आई है।

राज्य सरकार का मानना है कि नई योजना से उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी और छात्र भविष्य के रोजगार के अवसरों के लिए अधिक सक्षम हो सकेंगे। यह पहल शिक्षा को सुलभ बनाने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।