सुपरकंप्यूटर प्रतिस्पर्धा में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ा, आठ वर्षों बाद शीर्ष स्थान प्राप्त

सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां चीन ने एक बार फिर अमेरिका को पछाड़कर दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटर का खिताब अपने नाम कर लिया है। लगभग आठ वर्षों के अंतराल के बाद, चीन के शेनझेन शहर में विकसित ‘लाइनशाइन’ (LineShine) नामक सुपरकंप्यूटर ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसने अमेरिका के ‘एल कैप्टन’ (El Capitan) को पीछे छोड़ दिया है, जो नवंबर 2024 से इस सूची में प्रथम स्थान पर था। एल कैप्टन कैलिफोर्निया के लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लैब में स्थित है। टॉप-500 सूची के अनुसार, लाइनशाइन ने प्रदर्शन के मामले में सभी को पीछे छोड़ दिया है।

बीस प्रतिशत अधिक तेज चीनी प्रणाली

कंप्यूटर वैज्ञानिक जैक डोंगारा के अनुसार, लाइनशाइन के परीक्षण परिणाम एल कैप्टन की तुलना में 20% से अधिक बेहतर पाए गए। डोंगारा ने हाल ही में शेनझेन क्लाउड कंप्यूटिंग सेंटर का दौरा कर इस मशीन का परीक्षण किया था। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली इसलिए विशेष है क्योंकि यह उन GPU चिप्स पर निर्भर नहीं है जिनका उपयोग अधिकांश उच्च-स्तरीय सुपरकंप्यूटर करते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, लाइनशाइन में लगभग 1.4 करोड़ कंप्यूटिंग कोर लगे हैं, जिन्हें 90 हार्डवेयर कैबिनेट में स्थापित किया गया है। इन चिप्स का डिजाइन ब्रिटेन की कंपनी आर्म होल्डिंग्स की तकनीक पर आधारित है, जो वर्तमान में जापानी समूह सॉफ्टबैंक के नियंत्रण में है। आर्म की तकनीक स्मार्टफोन से लेकर डेटा सेंटर तक में इस्तेमाल होती है। हालांकि, चीन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन चिप्स का निर्माण किस कंपनी ने किया और इन्हें किस तकनीक से बनाया गया।

एनवीडिया के बिना दुनिया का सबसे तेज सिस्टम

आमतौर पर आधुनिक सुपरकंप्यूटर भारी गणनाओं के लिए एनवीडिया और एएमडी जैसी कंपनियों के GPU का उपयोग करते हैं। लेकिन लाइनशाइन ने एक अलग रास्ता चुना है। इस सुपरकंप्यूटर में सामान्य माइक्रोप्रोसेसर (CPU) का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, चिप्स के अंदर ही ऐसे विशेष सर्किट लगाए गए हैं जो AI और वैज्ञानिक गणनाओं में उपयोग होने वाले मैट्रिक्स और वेक्टर कैलकुलेशन को तेज बनाते हैं। यही कारण है कि चीन अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद एक ऐसा सिस्टम तैयार करने में सफल रहा है जो दुनिया के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटरों को टक्कर दे सकता है।

अमेरिका-चीन तकनीकी मुकाबला और तेज

यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब AI और चिप टेक्नोलॉजी को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा चरम पर है। एक ओर जहां अमेरिकी कंपनियां दुनिया के सबसे उन्नत AI मॉडल बना रही हैं, वहीं एनवीडिया AI चिप बाजार में अपना दबदबा बनाए हुए है। दूसरी ओर, चीन भी नए रास्ते तलाश रहा है। पिछले साल, एक चीनी स्टार्टअप ने कम संख्या में विशेष AI चिप्स का उपयोग करके उन्नत AI मॉडल पेश कर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि तकनीकी वर्चस्व की लड़ाई में दोनों देश लगातार नई रणनीतियाँ अपना रहे हैं।

सुपरकंप्यूटर के उपयोग

सुपरकंप्यूटर दशकों से विभिन्न जटिल कार्यों में उपयोग होते रहे हैं। इनमें मौसम की भविष्यवाणी, जलवायु मॉडलिंग, कोड तोड़ना, परमाणु हथियारों का डिजाइन और जटिल वैज्ञानिक शोध शामिल हैं। हाल के वर्षों में AI के बढ़ते प्रभाव के कारण वैज्ञानिक संस्थान पारंपरिक सुपरकंप्यूटिंग और AI को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। लाइनशाइन की डिजाइन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर सकता है।