मेटा का गुप्त AI प्रोजेक्ट: कर्मचारियों की निगरानी का खेल हुआ बेकार, डेटा लीक के बाद रोका गया कार्यक्रम
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा को अपने एक गुप्त आंतरिक AI प्रोजेक्ट के कारण भारी विवाद का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने हाल ही में अपने कर्मचारियों के कंप्यूटर उपयोग की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने वाले एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को अचानक रोक दिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब इस प्रोजेक्ट के तहत जुटाया गया संवेदनशील डेटा कंपनी के आंतरिक नेटवर्क में ही लीक हो गया। इस घटना ने न केवल कर्मचारियों की निजता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि कंपनी की डेटा सुरक्षा व्यवस्था को भी चुनौती दी है।
क्या था यह विवादास्पद AI प्रशिक्षण कार्यक्रम?
मेटा ने अप्रैल 2026 में ‘मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव’ (MCI) नामक एक आंतरिक AI प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया था। यह कार्यक्रम कंपनी की मेटा सुपर इंटेलिजेंस लैब्स टीम द्वारा विकसित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य AI मॉडलों को यह सिखाना था कि मनुष्य कंप्यूटर का उपयोग कैसे करते हैं।
कंपनी का मानना था कि भविष्य में ऐसे AI एजेंट विकसित करने के लिए यह समझना आवश्यक है कि लोग वास्तव में अपने कंप्यूटर पर किस प्रकार काम करते हैं। इसी उद्देश्य से कर्मचारियों के वास्तविक उपयोग पैटर्न को रिकॉर्ड किया जा रहा था, जैसे कि ड्रॉपडाउन मेन्यू का चयन करना, कीबोर्ड शॉर्टकट का उपयोग करना, और विभिन्न स्क्रीन पर नेविगेट करना।
कर्मचारियों की किन गतिविधियों पर थी नजर?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सिस्टम कर्मचारियों के कंप्यूटर उपयोग से जुड़ी कई गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहा था। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
- कीबोर्ड पर दबाए जाने वाले की-स्ट्रोक्स
- माउस की हरकतें और क्लिक करने के पैटर्न
- वर्कस्टेशन पर होने वाली अन्य गतिविधियां
मेटा का दावा था कि यह डेटा केवल AI मॉडलों को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग किया जाएगा और इसके लिए मजबूत गोपनीयता सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। कंपनी ने शुरुआत में आश्वासन दिया था कि यह डेटा पूरी तरह से सुरक्षित और लॉकडाउन रखा जाएगा, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
डेटा लीक की घटना कैसे हुई?
मामला तब गंभीर रूप ले गया जब यह संवेदनशील डेटा कंपनी के व्यापक आंतरिक नेटवर्क में फैल गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डेटा लीक में कर्मचारियों की बेहद निजी बातचीत, उनके प्रदर्शन से जुड़ा डेटा और मीटिंग्स के ट्रांसक्रिप्शन शामिल थे। यह सारी जानकारी पूरी कंपनी के सामने आ गई।
इस भीषण डेटा लीक की गंभीरता को देखते हुए मेटा ने इसे आंतरिक रूप से SEV 2 श्रेणी का खतरा घोषित किया। यह एक गंभीर श्रेणी है, जहां 0 सबसे गंभीर स्तर माना जाता है। इस घटना ने कंपनी की डेटा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्मचारियों में बढ़ता असंतोष और नाराजगी
डेटा लीक की इस घटना ने कर्मचारियों में पहले से ही मौजूद असंतोष को और बढ़ा दिया। दरअसल, यह प्रोग्राम ज्यादातर कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया था, जिससे वे शुरू से ही असहज थे। कर्मचारियों को चिंता थी कि इससे उनकी निजी गतिविधियों और व्यवहार को रिकॉर्ड किया जा रहा है।
एक कर्मचारी ने कंपनी के आंतरिक समूह में अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए लिखा कि वह बहुत गुस्से में है। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें किसी बाहरी या दुर्भावनापूर्ण पहुंच का कोई सबूत नहीं दिख रहा, लेकिन यह तथ्य कि डेटा मूल वादे के अनुसार पूरी तरह सुरक्षित और लॉकडाउन नहीं रह सका, बेहद निराशाजनक है।
मेटा का आधिकारिक बयान
इस पूरे मामले पर मेटा के प्रवक्ता ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम को गोपनीयता सुरक्षा उपायों के साथ बहुत सावधानीपूर्वक डिजाइन किया गया था। फिलहाल कंपनी को कोई ऐसा संकेत नहीं मिला है कि किसी कर्मचारी ने लीक डेटा का अनुचित उपयोग किया हो, लेकिन पूरी जांच होने तक इस प्रोग्राम को रोक दिया गया है।
हालांकि, इस रोक के बावजूद मेटा AI के लिए डेटा जुटाने के अपने इरादों से पीछे नहीं हट रहा है। कंपनी के CTO एंड्रयू बोसवर्थ ने एक अलग आंतरिक संदेश में खुलासा किया है कि कंपनी अपने ‘AI for Work’ प्रयासों के तहत आंतरिक डेटा संग्रह को और तेज करेगी। इस प्रयास को अब ‘Agent Transformation Accelerator’ (ATA) का नया नाम दिया गया है।
AI को इंसानों जैसा बनाने की महत्वाकांक्षा
मेटा का मानना है कि भविष्य में ऐसे AI एजेंट विकसित किए जाएंगे जो लोगों की रोजमर्रा की कंप्यूटर गतिविधियों में मदद कर सकें। कंपनी के अनुसार, यदि AI को इंसानों की तरह काम करना सिखाना है, तो उसे यह समझना भी जरूरी है कि लोग वास्तव में कंप्यूटर के साथ कैसे इंटरैक्ट करते हैं। यही कारण था कि कर्मचारियों की वास्तविक गतिविधियों के आधार पर AI मॉडलों को प्रशिक्षित किया जा रहा था।
लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि डेटा सुरक्षा और कर्मचारियों की निजता के प्रति संवेदनशीलता के बिना ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं भारी विवाद का कारण बन सकती हैं। यह घटना टेक कंपनियों के लिए एक चेतावनी है कि AI विकास के नाम पर कर्मचारियों की निजता से समझौता करना उनके लिए भारी पड़ सकता है।