चीन का अनोखा प्रयोग: गाओकाओ परीक्षा में बिजली सप्लाई के लिए रोबोटिक सांप तैनात

भारत में जिस प्रकार UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्व है, उसी तरह चीन में गाओकाओ (Gaokao) नामक कॉलेज प्रवेश परीक्षा को सर्वोपरि माना जाता है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में किसी भी प्रकार की बाधा से बचने के लिए चीन ने एक अत्याधुनिक और विचित्र तकनीक का सहारा लिया। लगभग 1.29 करोड़ छात्रों की इस परीक्षा के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हाई-टेंशन बिजली लाइनों पर ‘रोबोटिक सांप’ उतारे गए। यह प्रयोग युन्नान प्रांत के कुनमिंग शहर में किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। आइए समझते हैं कि आखिर यह तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है।

क्या हैं ये रोबोटिक सांप और इनकी कार्यप्रणाली?

ये रोबोट दिखने और चलने के तरीके में बिल्कुल वास्तविक सांपों जैसे होते हैं। इन्हें विशेष रूप से बिजली के तारों पर रेंगने और निरीक्षण करने के लिए डिजाइन किया गया है।

  • तारों से लिपटकर चलना: ये रोबोट बिजली के तारों को अपने चारों ओर लपेट लेते हैं और सांप की तरह रेंगते हुए आगे बढ़ते हैं।
  • उन्नत सेंसर और कैमरे: इन रोबोटिक सांपों में हाई-टेक कैमरे और संवेदनशील सेंसर लगे होते हैं, जो तारों की हर छोटी-बड़ी समस्या को पकड़ लेते हैं।
  • त्वरित दोष पहचान: तारों पर रेंगते हुए ये तुरंत बता सकते हैं कि कहां ओवरहीटिंग हो रही है, कौन सा तार पुराना हो गया है, या कहां कोई फॉल्ट आ गया है।

इंसानों और ड्रोन से कहीं बेहतर

चीन में आमतौर पर बिजली लाइनों की जांच के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इन रोबोटिक सांपों ने ड्रोन और इंसानी श्रम दोनों को पीछे छोड़ दिया है। इनकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • तीन गुना अधिक गति: यह रोबोट इंसानी कर्मचारियों की तुलना में तीन गुना तेजी से तारों का निरीक्षण कर सकते हैं।
  • जान का जोखिम खत्म: सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब बिजली कर्मचारियों को ऊंचे खंभों और तारों पर चढ़कर अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ती।
  • खुद को चार्ज करने की क्षमता: इन रोबोट्स में वायरलेस चार्जिंग सिस्टम लगा है। ये तारों पर रेंगते हुए उसी बिजली लाइन से अपनी बैटरी चार्ज कर लेते हैं। इससे इन्हें बार-बार नीचे उतारकर चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • नो-फ्लाइंग जोन में कारगर: हवाई अड्डों के आसपास ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं होती। ऐसे क्षेत्रों में इन रोबोटिक सांपों ने लगभग 130 किलोमीटर लंबी बिजली लाइनों का सफलतापूर्वक निरीक्षण किया।
  • हर मौसम में काम: तेज हवा या बारिश में ड्रोन काम करना बंद कर देते हैं, जबकि ये रोबोटिक सांप किसी भी मौसम में बिजली के तारों पर अपना काम करते रहते हैं।
  • अत्यधिक लचीलापन: इनके शरीर में कई जोड़ होते हैं, जो इन्हें इतना लचीला बनाते हैं कि ये तारों के बीच लगे बड़े इंसुलेटर को भी आसानी से पार कर सकते हैं।

यह तकनीक न केवल परीक्षा के दौरान बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित करने में सहायक है, बल्कि यह बिजली वितरण प्रणाली के रखरखाव के तरीके में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। रोबोटिक सांपों का यह प्रयोग दर्शाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक रोजमर्रा की चुनौतियों का सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रदान कर सकती है।