AI के बढ़ते खर्च ने कंपनियों की बढ़ाई चिंता, KPMG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज के डिजिटल युग में हर संगठन के लिए एक अनिवार्य जरूरत बन गया है। लेकिन इस तकनीक को अपनाने का खर्च कई कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। KPMG की हालिया रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें बताया गया है कि दुनियाभर की लगभग 74 प्रतिशत कंपनियों को अपने AI उपयोग के वास्तविक खर्च की सही जानकारी नहीं है।
AI बिलिंग की पेचीदगी को समझना
पिछले एक साल में AI टूल्स ने कारोबारी दुनिया में अपनी जगह मजबूती से बना ली है। कंपनियां अपने दैनिक कार्यों को सुचारू बनाने के लिए ओपनएआई के कोडेक्स और क्लॉड कोड जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, इन टूल्स की बढ़ती कीमतों ने कई संगठनों के बजट को प्रभावित किया है। KPMG के सर्वेक्षण में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मात्र 26 प्रतिशत कंपनियों के पास अपने AI खर्च का पूरा और स्पष्ट ब्यौरा है।
लगभग 50 प्रतिशत कंपनियों को खर्च का आंशिक अंदाजा है, लेकिन वे पूरी तस्वीर नहीं देख पातीं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 22 प्रतिशत कंपनियों ने स्वीकार किया कि उन्हें अपने AI बिल के बारे में लगभग कोई जानकारी नहीं होती और वे केवल बिल आने के बाद ही असली खर्च देख पाती हैं। सीधे शब्दों में कहें तो हर चार में से सिर्फ एक कंपनी ही अपने AI बिल को पूरी तरह से समझ पाती है।
टोकन आधारित प्राइसिंग: खर्च बढ़ने की असली वजह
AI सेवाओं की लागत को समझने के लिए टोकन आधारित प्राइसिंग मॉडल को जानना जरूरी है। ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां टोकन नामक एक माप इकाई का उपयोग करती हैं। जितना अधिक कोई व्यक्ति या संगठन AI से काम करवाता है, उतने अधिक टोकन खर्च होते हैं। कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए लाइसेंस खरीदती हैं जिनमें सीमित टोकन शामिल होते हैं। जैसे ही यह सीमा पार होती है, अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।
KPMG के वैश्विक AI प्रमुख स्टीव चेस के अनुसार, AI एक ऐसा नया संसाधन बन गया है जिसकी खपत और लागत दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। कई कंपनियां इसकी रफ्तार का सही अनुमान नहीं लगा पा रही हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ संगठनों ने अपना पूरे साल का AI और क्लाउड बजट मात्र कुछ महीनों में ही खर्च कर दिया। कई कंपनियों में टोकन का उपयोग छह गुना तक बढ़ गया है, जो लागत नियंत्रण को और मुश्किल बना रहा है।
उबर और अमेजन जैसे दिग्गज भी नहीं बचे
बढ़ती AI लागत का असर बड़ी टेक कंपनियों पर भी साफ देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, उबर ने अपना साल भर का AI बजट मात्र चार महीने में ही खर्च कर दिया। इसके बाद कंपनी ने अपने हर कर्मचारी के लिए AI उपयोग की सीमा 1,500 डॉलर (लगभग 1,42,000 रुपये) तय कर दी है। वहीं, एक अन्य कंपनी ने कथित तौर पर सिर्फ एक महीने में क्लॉड AI पर करीब 50 करोड़ डॉलर खर्च कर दिए।
वॉलमार्ट और उबर जैसी कंपनियां लागत बढ़ने के डर से AI के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रही हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी हाल ही में स्वीकार किया कि AI की लागत अब एक बड़ी चिंता बन गई है। उन्होंने बताया कि कई कंपनियां मजाक में कह रही हैं कि उनका पूरा 2026 का बजट पहली तिमाही में ही खत्म हो गया। यह स्थिति AI बाजार के परिपक्व होने का संकेत है, जहां कंपनियां अब खर्च को नियंत्रित करने के उपाय ढूंढ रही हैं।
AI में निवेश जारी, लेकिन रिटर्न पर उठ रहे सवाल
बढ़ती लागत के बावजूद टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही हैं। गूगल ने हाल ही में 80 अरब डॉलर जुटाने की घोषणा की है, जिसका बड़ा हिस्सा AI परियोजनाओं पर खर्च होगा। वहीं, एंथ्रोपिक ने IPO की तैयारी शुरू कर दी है और उसकी वैल्यूएशन एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ओपनएआई के भी भविष्य में पब्लिक होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियों के लिए AI के लाभ और उसकी लागत के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। जहां एक तरफ AI तकनीक कारोबार को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है, वहीं इसका अनियंत्रित खर्च संगठनों की वित्तीय सेहत को कमजोर कर सकता है। KPMG की यह रिपोर्ट कंपनियों को AI खर्च पर नजर रखने और एक स्पष्ट रणनीति बनाने की आवश्यकता पर जोर देती है।