ASCI रिपोर्ट: डिजिटल विज्ञापनों में 97% उल्लंघन, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सबसे अधिक भ्रामक विज्ञापन

भारत में डिजिटल प्लेटफार्मों पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है। एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले 97 प्रतिशत से अधिक विज्ञापन डिजिटल माध्यमों पर पाए गए। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत विज्ञापन मेटा के स्वामित्व वाले फेसबुक और इंस्टाग्राम पर थे।

डिजिटल प्लेटफार्मों पर सबसे अधिक उल्लंघन

ASCI ने अपनी जांच के दौरान कुल 9,611 ऐसे विज्ञापनों की पहचान की जो नियमों के खिलाफ थे। इनमें से अधिकांश डिजिटल दुनिया से जुड़े थे। आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल मीडिया में 97.36 प्रतिशत विज्ञापन भ्रामक या नियम-विरुद्ध पाए गए। इसके विपरीत, टेलीविजन पर केवल 2.04 प्रतिशत और प्रिंट मीडिया में मात्र 0.26 प्रतिशत विज्ञापन ही नियमों का उल्लंघन करते पाए गए। यह स्पष्ट संकेत है कि डिजिटल प्लेटफार्मों पर निगरानी की सख्त आवश्यकता है।

मेटा के प्लेटफार्म सबसे आगे

डिजिटल प्लेटफार्मों में भी मेटा की स्थिति सबसे खराब रही। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कुल नियम-उल्लंघन करने वाले डिजिटल विज्ञापनों का 79.84 प्रतिशत हिस्सा पाया गया। वहीं, गूगल के प्लेटफार्मों (यूट्यूब सहित) पर यह आंकड़ा महज 3.59 प्रतिशत रहा। अन्य वेबसाइटों पर लगभग 13 प्रतिशत भ्रामक विज्ञापन देखे गए। यह आंकड़ा बताता है कि मेटा को अपने विज्ञापन नीतियों पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की जरूरत है।

सट्टेबाजी क्षेत्र में सबसे अधिक गड़बड़ी

इस वर्ष ASCI ने कुल 11,581 विज्ञापनों की समीक्षा की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है। सबसे अधिक नियम तोड़ने वाले क्षेत्रों की बात करें तो ऑफशोर बेटिंग (सट्टेबाजी) के 6,933 मामले सामने आए, जो सबसे अधिक हैं। इसके बाद रियल एस्टेट क्षेत्र में 643 और पर्सनल केयर क्षेत्र में 576 मामले दर्ज किए गए। यह दर्शाता है कि ये क्षेत्र उपभोक्ताओं को गुमराह करने में सबसे आगे हैं।

हानिकारक उत्पादों का बढ़ता प्रचार

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 75 प्रतिशत विज्ञापनों में ऐसे उत्पादों का प्रचार किया गया जो स्वास्थ्य या वित्तीय रूप से हानिकारक हो सकते हैं। वहीं, 27 प्रतिशत विज्ञापनों में ग्राहकों को धोखा देने के लिए झूठे दावों का सहारा लिया गया। हालांकि, ASCI की सख्त कार्रवाई के बाद इनमें से 98 प्रतिशत विज्ञापनों को संशोधित करना पड़ा, जो एक सकारात्मक संकेत है।

विशेषज्ञों की चिंता

ASCI के चेयरमैन सुधांशु वत्स ने इस रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ा-चढ़ाकर दावे करना, फर्जी वैज्ञानिक प्रमाण पेश करना और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों के माध्यम से भ्रामक प्रचार करना आम बात हो गई है। डिजिटल दुनिया की तेज गति और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण यह आवश्यक हो गया है कि डिजिटल विज्ञापनों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

यह रिपोर्ट उपभोक्ताओं को सचेत करती है कि वे डिजिटल विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी उत्पाद या सेवा को खरीदने से पहले उसकी पूरी जांच कर लें। साथ ही, यह डिजिटल प्लेटफार्मों के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें अपनी विज्ञापन नीतियों को और अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना होगा।