भारत में सस्ते स्मार्टफोन का संकट: कीमतें बढ़ीं, ग्राहकों पर महंगाई का बोझ
भारत का स्मार्टफोन बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। रिसर्च फर्म IDC की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 10 हजार रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन धीरे-धीरे बाजार से गायब हो रहे हैं। इससे आम उपभोक्ताओं को मजबूरन अपना बजट बढ़ाकर महंगे फोन खरीदने पड़ रहे हैं। आइए समझते हैं कि यह बदलाव क्यों हो रहा है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है।
सस्ते फोन का बाजार सिकुड़ा
IDC रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में 10 हजार रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बाजार हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से गिरकर मात्र 8 प्रतिशत रह गई है। यह गिरावट बेहद चिंताजनक है। इस सेगमेंट में पहले जहां कई कंपनियां नए मॉडल लॉन्च करती थीं, वहीं अब कंपनियों ने इस बजट में फोन बनाना लगभग बंद कर दिया है। इसकी मुख्य वजह फोन के पार्ट्स, खासकर मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें हैं। दुनियाभर में इन पार्ट्स के दाम बढ़ने से कंपनियों के लिए 10 हजार रुपये से कम कीमत का फोन बनाकर मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया है।
ग्राहकों पर ‘मजबूरन प्रीमियमीकरण’ का दबाव
बाजार में सस्ते फोन के विकल्प खत्म होने का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। जो लोग पहले 10 हजार रुपये से कम बजट में फोन खरीदते थे, उन्हें अब अपनी मर्जी के खिलाफ अपना बजट बढ़ाना पड़ रहा है। IDC ने इस ट्रेंड को ‘फोर्स्ड प्रीमियमाइजेशन’ यानी मजबूरन महंगा फोन खरीदना नाम दिया है। यह कोई शौक या अपग्रेड नहीं, बल्कि महंगाई के कारण उठाया गया एक मजबूरी भरा कदम है।
इस मजबूरी का नतीजा यह हुआ है कि 10 हजार से 20 हजार रुपये वाले बजट सेगमेंट में 10 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। इस सेगमेंट की बाजार हिस्सेदारी 39 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत पर पहुंच गई है। सस्ते फोन की कमी और महंगे फोन की ओर बढ़ते रुझान के कारण भारत में एक स्मार्टफोन की औसत कीमत (एवरेज सेलिंग प्राइस) में 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह कीमत अब 30 हजार रुपये के ऑल-टाइम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
ऑनलाइन बिक्री में गिरावट, ऑफलाइन दुकानों की वापसी
आमतौर पर सस्ते और बजट स्मार्टफोन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले बड़े डिस्काउंट और ऑफर्स के कारण खूब बिकते थे। लेकिन अब मोबाइल कंपनियों ने इन प्रमोशनल ऑफर्स पर कटौती कर दी है। इसका सीधा झटका ऑनलाइन मार्केट को लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑफर्स कम होने की वजह से स्मार्टफोन की ऑनलाइन बिक्री में 14 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
इससे ऑनलाइन मार्केट की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 38 प्रतिशत रह गई है। दूसरी ओर, ऑनलाइन मिलने वाले फायदे खत्म होने के बाद ग्राहकों का रुझान एक बार फिर अपने स्थानीय मोबाइल डीलरों की ओर बढ़ा है। इस तिमाही में कुल स्मार्टफोन बाजार में ऑफलाइन स्टोर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 62 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर पहुंच गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि ग्राहक अब फोन खरीदने के लिए फिर से पारंपरिक दुकानों पर जाने लगे हैं।
बाजार में बदलता समीकरण
IDC रिपोर्ट के ये आंकड़े भारतीय स्मार्टफोन बाजार में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं। पार्ट्स की बढ़ती कीमतों ने सस्ते फोन के बाजार को लगभग खत्म कर दिया है। वहीं, ग्राहकों को मजबूरन महंगे फोन खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे फोन की औसत कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऑनलाइन सेल की चमक फीकी पड़ने के बाद अब ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स की वापसी हो रही है। यह स्थिति आने वाले समय में भारत के मोबाइल मार्केट की दिशा तय करेगी।