बिजली के बिना ठंडक: वैज्ञानिकों ने खोजी नेस्कॉड तकनीक, जानिए कैसे करती है काम
बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच एयर कंडीशनर का उपयोग कई लोगों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने ‘नेस्कॉड’ (Nescod) नामक एक नई प्रणाली विकसित की है। यह प्रणाली बिना बिजली के काम करती है और पर्यावरण के अनुकूल भी है।
बिना बिजली के ठंडा करने वाला यह सिस्टम कैसे काम करता है?
सऊदी अरब के किंग अब्दुल्ला विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा कूलिंग तरीका खोजा है जो पूरी तरह से बिजली पर निर्भर नहीं है। इस तकनीक को ‘नो इलेक्ट्रिसिटी एंड सस्टेनेबल कूलिंग ऑन डिमांड’ यानी नेस्कॉड नाम दिया गया है। जर्नल ऑफ एनर्जी एंड एनवायर्नमेंटल साइंस में प्रकाशित इस शोध में प्रोफेसर पेंग वांग और उनकी टीम ने प्राकृतिक प्रक्रियाओं और सामान्य सामग्रियों का उपयोग करके यह अद्भुत प्रणाली बनाई है।
बिना बिजली के चलने वाला यह एसी अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग करता है। यह वही रासायनिक यौगिक है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर खेतों में उर्वरक के रूप में किया जाता है। अमोनियम नाइट्रेट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जब इसे पानी में घोला जाता है, तो यह अपने आस-पास की गर्मी को तेजी से अवशोषित कर लेता है। जैसे-जैसे यह पानी में घुलता है, आसपास का तापमान तेजी से गिरने लगता है और प्रभावी ठंडक पैदा होती है।
बीस मिनट में दिखता है असर
शोधकर्ताओं ने अपने परीक्षणों में पाया कि पानी और अमोनियम नाइट्रेट का यह मिश्रण अत्यधिक प्रभावी है। इस मिश्रण ने मात्र बीस मिनट के भीतर तापमान को 25 डिग्री सेल्सियस से घटाकर 3.6 डिग्री सेल्सियस तक ला दिया। यह ठंडा करने की क्षमता सामान्य रसायनों की तुलना में कहीं अधिक है, जो इसे बिना बिजली वाले कूलिंग सिस्टम के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प बनाती है।
सौर ऊर्जा से खुद को रीचार्ज करता है सिस्टम
नेस्कॉड की सबसे अनोखी बात यह है कि यह बिना बिजली के खुद को पुनः उपयोग के लिए तैयार कर लेता है। एक बार गर्मी सोखने के बाद, यह प्रणाली सौर ऊर्जा की मदद से पानी को वाष्प में बदल देती है। इस प्रक्रिया से अमोनियम नाइट्रेट वापस अपने ठोस रूप में आ जाता है और इसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। खास बात यह है कि वाष्प बने पानी को भी इकट्ठा करके पुनः उपयोग में लाया जाता है, जिससे पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भी यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
दवाइयों और टीकों के संरक्षण में सहायक
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, दुनिया भर में कुल बिजली का लगभग दस प्रतिशत हिस्सा सिर्फ एसी चलाने में खर्च होता है। इसके अलावा, दुनिया में लगभग सत्तर करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके पास आज भी बिजली उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नेस्कॉड तकनीक एक बड़ा बदलाव ला सकती है। फिलहाल यह तकनीक विकसित हो रही है और भविष्य में यदि इसे लॉन्च किया जाता है, तो यह पारंपरिक एसी के मुकाबले काफी किफायती होगी।
घर को ठंडा रखने के अलावा, यह तकनीक दूरदराज के इलाकों में खाने-पीने की वस्तुओं, जीवन रक्षक दवाइयों और टीकों को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस आविष्कार को एक टिकाऊ और कार्बन उत्सर्जन मुक्त भविष्य की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
- यह प्रणाली अमोनियम नाइट्रेट और पानी के मिश्रण से ठंडक पैदा करती है।
- यह बीस मिनट में तापमान को काफी हद तक कम कर सकती है।
- सौर ऊर्जा का उपयोग करके यह सिस्टम खुद को रिचार्ज करता है।
- यह बिजली की खपत को कम करने में सहायक हो सकती है।
- दवाओं और टीकों के भंडारण के लिए यह एक वरदान साबित हो सकती है।