ग्रामीण महिलाओं को साइबर सुरक्षित बनाने की अनूठी पहल: ई-सेफहर अभियान
डिजिटल इंडिया के बढ़ते कदमों के साथ ही साइबर अपराधों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं, जो तेजी से इंटरनेट और स्मार्टफोन का उपयोग करना सीख रही हैं, उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसी चुनौती को देखते हुए रिलायंस फाउंडेशन और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने मिलकर ‘ई-सेफहर’ नामक एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य देश भर में दस लाख ग्रामीण महिलाओं को साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण देना और उन्हें ‘साइबर सखी’ के रूप में तैयार करना है।
कैसे काम करेगा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम?
यह पूरा कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (आईएसईए) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। इस साझेदारी में सी-डैक की भूमिका प्रशिक्षण की सामग्री तैयार करने की होगी। वे ऑडियो-विजुअल मॉड्यूल और बहुभाषी पाठ्यक्रम विकसित करेंगे, ताकि विभिन्न राज्यों की महिलाएं अपनी स्थानीय भाषा में आसानी से सीख सकें। इसके बाद रिलायंस फाउंडेशन इस सामग्री को जमीनी स्तर पर ले जाएगा और गांव-गांव में महिलाओं को प्रशिक्षित करेगा।
शुरुआत कहां से होगी?
इस महत्वाकांक्षी अभियान की शुरुआत मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों से की जाएगी। इन राज्यों में सफलतापूर्वक कार्यक्रम चलाने के बाद इसे धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में विस्तारित करने की योजना है।
क्यों जरूरी है यह पहल?
ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति तेजी से फैल रही है। आज महिलाएं ऑनलाइन पेमेंट, सरकारी योजनाओं की जानकारी और डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा रही हैं। लेकिन इसके साथ ही फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक और सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में केवल इंटरनेट चलाना सिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने के तरीके भी सिखाने जरूरी हैं। यह पहल महिलाओं को न केवल डिजिटल रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार और सुरक्षित डिजिटल नागरिक भी बनाएगी।
समुदाय आधारित मॉडल की ताकत
इस अभियान की सबसे खास बात इसका समुदाय-संचालित (कम्युनिटी-ड्रिवन) मॉडल है। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं ही आगे चलकर ‘साइबर सखी’ बन जाएंगी। ये साइबर सखियां अपने गांव की अन्य महिलाओं और बच्चों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगी। इस तरह से एक श्रृंखला बनेगी, जो बिना किसी बड़े बुनियादी ढांचे के गांव-गांव तक जागरूकता फैलाएगी। यह मॉडल न केवल प्रभावी है, बल्कि इसे तेजी से फैलाना भी आसान होगा।
विशेषज्ञों की राय
डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल दुनिया में आत्मविश्वास से काम करने के लिए सशक्त बनाना समय की मांग है। उन्हें सिर्फ टूल का उपयोग नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित उपयोग की समझ भी होनी चाहिए। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनमें आत्मविश्वास जगाने में एक अहम भूमिका निभाएगी।
- इस अभियान के तहत तीन वर्षों में दस लाख महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
- प्रशिक्षण सामग्री स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध होगी।
- प्रशिक्षित महिलाएं आगे चलकर अपने समुदाय में जागरूकता फैलाएंगी।
- यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश और ओडिशा से शुरू होकर पूरे देश में फैलेगा।