भारत में स्मार्टफोन की कीमतों में 40% तक की बढ़ोतरी, कई बड़े ब्रांड हुए महंगे

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जो आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर नहीं है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, देश में सबसे अधिक बिकने वाले वीवो, सैमसंग, ओप्पो, रियलमी, शाओमी और नथिंग जैसे ब्रांडों ने अपने हैंडसेट्स के दामों में जबरदस्त उछाल दिया है। कुछ मॉडलों की कीमतों में 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है, जिससे एंट्री-लेवल और बजट सेगमेंट के ग्राहकों के लिए नया फोन खरीदना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 के अंत से अब तक करीब आठ प्रमुख ब्रांडों ने अपने लोकप्रिय मॉडलों की कीमतों में औसतन 1,500 रुपये तक की वृद्धि की है।

क्यों बढ़ रही हैं स्मार्टफोन की कीमतें?

स्मार्टफोन के महंगे होने के पीछे सबसे प्रमुख कारण वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स (DRAM और NAND) की भारी कमी है। दरअसल, सेमीकंडक्टर बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे सैमसंग, माइक्रोन और एसके हाइनिक्स अब अपना अधिकांश ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए उपयोग होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स के उत्पादन पर केंद्रित कर रही हैं। एनवीडिया जैसे एआई डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण सामान्य फोन में लगने वाली चिप्स का उत्पादन घट गया है, जिससे इनकी लागत 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गई है। तकनीकी विशेषज्ञ इसे ‘एआई टैक्स’ का नाम दे रहे हैं, जिसका बोझ सीधे आम ग्राहकों पर डाला जा रहा है।

वैश्विक तनाव और गिरता रुपया भी बड़ी वजह

कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सिर्फ तकनीकी कारण ही नहीं, बल्कि दुनिया के मौजूदा हालात भी जिम्मेदार हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे शिपिंग और लॉजिस्टिक्स की लागत में काफी इजाफा हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितता के कारण ग्राहक अब पुराने फोन को ही रिपेयर कराकर चलाने को मजबूर हैं। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले लगातार गिरते रुपये ने भी समस्या को और बढ़ा दिया है, जिससे कंपनियों के लिए पार्ट्स का आयात करना और भी महंगा हो गया है।

ग्राहकों का रुझान रिपेयरिंग की ओर

महंगाई का असर अब साफ तौर पर बाजार में दिखाई देने लगा है। साल 2026 के शुरुआती हफ्तों में स्मार्टफोन की बिक्री में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मिड-रेंज और बजट फोन खरीदने वाले लोग अब अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं। लोग रसोई गैस और राशन जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दे रहे हैं और नया फोन खरीदने के बजाय पुराने फोन की स्क्रीन या बैटरी बदलवाकर उसकी उम्र बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल से जून की तिमाही मोबाइल उद्योग के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाली है और फिलहाल कीमतों में कमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

प्रीमियम सेगमेंट में जारी है प्रतिस्पर्धा

दिलचस्प बात यह है कि इस महंगाई के बीच एपल और सैमसंग के प्रीमियम मॉडल खुद को बेहतर स्थिति में बनाए हुए हैं। एपल का नवीनतम आईफोन 17 अपनी मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के कारण इस बढ़ोतरी से कम प्रभावित हुआ है, जिससे अमीर ग्राहकों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प बना हुआ है। वहीं, सैमसंग की गैलेक्सी S26 सीरीज को भी काफी सोच-समझकर पेश किया गया है ताकि चीनी ब्रांडों के महंगे होते हैंडसेट्स के मुकाबले ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित किया जा सके। हालांकि, बजट सेगमेंट में स्थिति काफी कठिन है और आने वाले समय में ‘सेकेंड हैंड’ या ‘यूज्ड फोन’ के बाजार में बड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है।

  • वीवो, सैमसंग, ओप्पो, रियलमी, शाओमी और नथिंग ने कीमतें बढ़ाईं
  • कुछ मॉडलों की कीमतों में 40% तक का इजाफा
  • मेमोरी चिप की कमी और AI की बढ़ती मांग मुख्य कारण
  • वैश्विक तनाव और गिरता रुपया भी जिम्मेदार
  • बिक्री में 9% की गिरावट, ग्राहक रिपेयरिंग पर जोर दे रहे
  • प्रीमियम सेगमेंट में एपल और सैमसंग की मजबूत पकड़