उपग्रह तकनीक से पुलों की होगी 24 घंटे निगरानी, गिरने से पहले मिलेगा खतरे का संकेत
आने वाले समय में पुल गिरने जैसी दुर्घटनाओं को पहले ही टाला जा सकेगा। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है, जो उपग्रहों के माध्यम से पुलों की कमजोरी को पकड़ने में सक्षम है। ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक पुलों से आने वाले शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचान सकती है, जिससे समय पर मरम्मत और सतर्कता संभव होगी।
744 पुलों पर हुआ गहन अध्ययन
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के 744 प्रमुख पुलों का विस्तृत विश्लेषण किया। इस अध्ययन में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के पुलों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है और इन क्षेत्रों में तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। यह रिसर्च बताती है कि कई पुल ऐसे हैं, जो किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
SAR तकनीक: कैसे करती है काम?
इस नवीन प्रणाली में ‘सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (SAR) तकनीक का उपयोग किया गया है। यह तकनीक इतनी संवेदनशील है कि यह जमीन में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को भी माप सकती है। उदाहरण के लिए, भूस्खलन या मिट्टी के धंसने के कारण पुल में आने वाले कुछ मिलीमीटर के झुकाव को भी यह पकड़ लेती है। SAR तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दिन हो या रात, या फिर घने बादल हों, हर मौसम में सटीक रूप से काम करने में सक्षम है।
लागत और समय की बचत
जहां भौगोलिक कारणों या दुर्गम स्थानों के कारण मौके पर जाकर जांच करना मुश्किल होता है, वहां यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो सकती है। उपग्रहों के माध्यम से दूर बैठकर ही पुलों की निरंतर निगरानी की जा सकेगी। इससे रखरखाव पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा और समय पर मरम्मत का काम भी संभव हो पाएगा।
- इस तकनीक के जरिए उच्च जोखिम वाले पुलों की पहचान में लगभग 33% तक सुधार देखा गया है।
- पारंपरिक सेंसर सिस्टम की तुलना में यह कहीं अधिक किफायती है।
- उपग्रहों की मदद से 60% से अधिक लंबे पुलों की नियमित निगरानी की जा सकती है।
बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में क्रांति
यह अत्याधुनिक तकनीक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। अगर इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाता है, तो पुलों से जुड़ी दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह प्रणाली न केवल पुलों बल्कि अन्य बड़े बुनियादी ढांचों की निगरानी के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।