ऑस्ट्रेलिया में AI प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती: 9 मार्च से लागू होंगे नए नियम, उल्लंघन पर ₹270 करोड़ तक का जुर्माना
ऑस्ट्रेलिया अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित टूल्स को भी अपने कड़े नियमों के दायरे में लाने का फैसला किया है। देश का ऑनलाइन सुरक्षा नियामक (ई-सेफ्टी रेगुलेटर) अब ChatGPT जैसे AI प्लेटफॉर्म्स पर भी सख्ती से नजर रखेगा। नियामक ने साफ किया है कि अगर कोई AI प्लेटफॉर्म 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अनुपयुक्त या हानिकारक सामग्री तक पहुंचने से रोकने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
9 मार्च से लागू होंगे नए नियम
ई-सेफ्टी रेगुलेटर के अनुसार, 9 मार्च 2026 से ऑस्ट्रेलिया में संचालित सभी ऑनलाइन सेवाओं के लिए कुछ अनिवार्य दिशा-निर्देश लागू हो जाएंगे। इन नियमों का उद्देश्य नाबालिगों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखना है। मुख्य बिंदुओं में शामिल हैं:
- कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ता अश्लील, अत्यधिक हिंसक, आत्महत्या या खाने के विकार (ईटिंग डिसॉर्डर) जैसी हानिकारक सामग्री तक न पहुंच सकें।
- नियामक की नजर सिर्फ AI कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि उन गेटकीपर्स पर भी होगी जो इन टूल्स को उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाते हैं।
- Google और Apple जैसे ऐप स्टोर्स, साथ ही Google और Bing जैसे सर्च इंजनों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।
- यदि कोई ऐप स्टोर या सर्च इंजन ऐसे AI ऐप को अपने प्लेटफॉर्म पर स्थान देता है जो नियमों का पालन नहीं कर रहा, तो उन पर भी कार्रवाई हो सकती है।
- नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग ₹270 करोड़) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
कंपनियों की तैयारी की स्थिति
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब दुनिया के 50 सबसे लोकप्रिय AI उत्पादों की जांच की गई, तो स्थिति काफी चिंताजनक पाई गई। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि:
- केवल 9 प्लेटफॉर्म ने अब तक आयु सत्यापन (एज वेरिफिकेशन) की व्यवस्था बनाई है।
- सिर्फ 11 प्लेटफॉर्म ने सामग्री फिल्टर लगाने या ऑस्ट्रेलिया में अपनी सेवाएं बंद करने की योजना बनाई है।
- 30 प्लेटफॉर्म ऐसे हैं जिन्होंने सुरक्षा के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
हालांकि, कुछ बड़े नामों ने पहले ही सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। ChatGPT, Replika और Claude जैसे प्लेटफॉर्म ने उम्र की जांच और कड़े फिल्टर लगाने शुरू कर दिए हैं। वहीं, Character.AI जैसे प्लेटफॉर्म ने 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए चैटिंग की सीमाओं को सीमित कर दिया है।
एपल का नया सुरक्षा उपाय
इस बीच, एपल ने एक नया सुरक्षा तंत्र विकसित किया है। कंपनी ने डेवलपर्स के लिए एक विशेष प्रणाली पेश की है, जिसके तहत 24 फरवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया में वयस्क रेटिंग वाले ऐप्स को केवल वही लोग डाउनलोड कर पाएंगे जो अपनी उम्र प्रमाणित करेंगे। यह कदम बच्चों को अनुपयुक्त सामग्री से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
क्यों पड़ी इस सख्ती की जरूरत?
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है जिसने दिसंबर 2025 में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि देश में अब तक चैटबॉट से जुड़ी हिंसा की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है, लेकिन नियामक को ऐसी रिपोर्ट मिली हैं कि 10 वर्ष तक के बच्चे रोजाना छह घंटे तक AI चैट टूल्स का उपयोग कर रहे हैं।
अधिकारियों को गहरी चिंता है कि AI कंपनियां मानवीय भावनाओं के साथ छेड़छाड़ करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे बच्चे इन टूल्स के जाल में फंसते जा रहे हैं। इसी डिजिटल खतरे से बच्चों को बचाने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने अब युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।
ऑस्ट्रेलिया का यह कदम दुनिया में AI नियमन के सबसे सख्त प्रयासों में से एक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य देश भी इसी तरह के नियम लागू कर सकते हैं।