एक्स का नया ‘मेड विद एआई’ लेबल: भारत के 2026 नियमों के बाद कड़े कदम

एलन मस्क के स्वामित्व वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स जल्द ही एक नई सुविधा ला सकता है, जिसका नाम ‘मेड विद एआई’ होगा। इस लेबल के जरिए उपयोगकर्ता यह बता पाएंगे कि उनकी पोस्ट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से बनाई गई है या उसमें बदलाव किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारत सरकार ने 2026 के लिए नए आईटी नियम लागू किए हैं, जो एआई-जनरेटेड सामग्री की पहचान को अनिवार्य बनाते हैं।

एप रिसर्चर नीमा ओवजी ने सबसे पहले इस फीचर के विकास की जानकारी साझा की। उनके अनुसार, एक्स इस लेबल पर काम कर रहा है ताकि उपयोगकर्ता अपनी पोस्ट में एआई के उपयोग को स्पष्ट कर सकें। यह सुविधा तब आ रही है जब दुनिया भर में डीपफेक और एआई-जनरेटेड सामग्री को लेकर चिंता बढ़ रही है। भारत में नए नियमों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एआई सामग्री की पारदर्शिता को जरूरी बना दिया है।

कैसे काम करेगा ‘मेड विद एआई’ लेबल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोस्ट प्रकाशित करते समय उपयोगकर्ताओं को एक टॉगल विकल्प मिलेगा। इसके जरिए वे चुन सकेंगे कि उनकी पोस्ट में एआई का इस्तेमाल किस रूप में हुआ है। संभावित विकल्प इस प्रकार हो सकते हैं:

  • टेक्स्ट एआई से जनरेट किया गया है
  • इमेज, वीडियो या ऑडियो एआई से बनाया गया है
  • सामग्री को एआई टूल्स की मदद से संपादित किया गया है

जब उपयोगकर्ता इस विकल्प को चालू करेगा, तो पोस्ट पर साफ-साफ ‘मेड विद एआई’ टैग दिखाई देगा। हालांकि, एक्स ने अब तक इस फीचर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह लेबल अनिवार्य होगा या वैकल्पिक। इसके अलावा, कंपनी यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि उपयोगकर्ता सही जानकारी दे रहे हैं, यह भी एक सवाल बना हुआ है।

भारत के 2026 आईटी नियमों की मुख्य बातें

भारत सरकार ने हाल ही में सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य एआई-जनरेटेड सामग्री को पारदर्शी बनाना और डीपफेक पर नियंत्रण रखना है। नए नियमों की प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:

  • कानूनी एआई-जनरेटेड सामग्री पर स्पष्ट और स्थायी लेबल लगाना अनिवार्य होगा
  • यह लेबल सामग्री के मेटाडेटा में स्थायी रूप से शामिल होना चाहिए
  • अदालत या सरकार के आदेश पर अवैध डीपफेक और हानिकारक सिंथेटिक सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा
  • नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म को आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली सुरक्षा (सेफ हार्बर) खोनी पड़ सकती है
  • सुरक्षा खत्म होने पर कंपनी को उपयोगकर्ता द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है

एआई डिस्क्लोजर की बढ़ती प्रवृत्ति

एआई सामग्री को लेकर सख्ती सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया भर की टेक कंपनियां इस दिशा में कदम उठा रही हैं। मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एआई डिस्क्लोजर लेबल लागू कर दिए हैं। यूट्यूब और टिकटॉक ने भी सिंथेटिक मीडिया के लिए नियम बनाए हैं। एक्स ने पहले ट्विटर के समय C2PA कंटेंट प्रॉवेनेंस स्टैंडर्ड अपनाया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया। अब भारत के नए नियमों के बाद कंपनी अपना अलग एआई लेबलिंग सिस्टम विकसित कर रही है।

एक्स ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ‘मेड विद एआई’ लेबल कब से शुरू होगा। लेकिन अगर यह फीचर लागू होता है, तो यह भारत के 2026 आईटी नियमों के अनुपालन की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। एआई टूल्स और डीपफेक के बढ़ते उपयोग के बीच, यह लेबल उपयोगकर्ताओं को यह समझने में मदद करेगा कि वे जो पोस्ट देख रहे हैं, वह मानव निर्मित है या एआई की मदद से तैयार की गई है।