यूरोप में सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ टेक दिग्गजों का मोर्चा
यूरोपीय देशों में किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी जोरों पर है। कई सरकारें 15 या 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इन प्लेटफॉर्म्स के उपयोग पर रोक लगाने पर विचार कर रही हैं। इस कदम के जवाब में अमेरिका की प्रमुख टेक कंपनियां, खासकर मेटा और अल्फाबेट, पूरी ताकत से मैदान में उतर गई हैं। ये कंपनियां विज्ञापन अभियानों, बंद कमरों की बैठकों और भारी लॉबिंग के जरिए इन प्रस्तावित कानूनों को रोकने की कोशिश कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ती सख्ती के पीछे कारण
सरकारों का तर्क है कि इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म किशोरों के लिए एक लत की तरह बन गए हैं। कई शोधों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम को अवसाद और आत्महत्या के बढ़ते मामलों से जोड़ा गया है। लॉस एंजिलिस में चल रहे एक महत्वपूर्ण मुकदमे में इंस्टाग्राम और यूट्यूब को ‘डिजिटल कैसीनो’ तक कहा गया है। आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया है कि उपयोगकर्ता लगातार स्क्रॉल करते रहें। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने इन आरोपों को खारिज किया है।
दुनिया भर में उठाए जा रहे कदम
दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के किशोरों के लिए दुनिया का पहला सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू किया। इसके बाद कई एशियाई देशों ने भी इसी तरह के कदमों की घोषणा की। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और डेनमार्क जैसे देश भी आने वाले महीनों में अपने स्वयं के नियम ला सकते हैं। अमेरिका के आठ राज्यों में भी इसी प्रकार के विधेयक पेश किए जा चुके हैं।
लॉबिंग पर खर्च किए जा रहे अरबों डॉलर
एक रिपोर्ट के अनुसार, टेक कंपनियां प्रतिबंध को रोकने के लिए राजनेताओं की लॉबिंग में भारी धन खर्च कर रही हैं। पिछले साल यूरोपीय संघ में इन कंपनियों ने लॉबिंग पर लगभग 151 मिलियन यूरो (लगभग 1618 करोड़ रुपये) खर्च किए। इनमें मेटा सबसे आगे रहा, जिसने 10 मिलियन यूरो खर्च किए, जबकि गूगल ने लगभग 4.5 मिलियन यूरो खर्च किए। यूरोप की राजधानी ब्रुसेल्स में ही 890 फुल-टाइम टेक लॉबिस्ट काम कर रहे हैं, जिनकी संख्या यूरोपीय संसद के कुल सदस्यों से भी अधिक है।
टेक कंपनियों का प्रस्ताव: प्रतिबंध नहीं, माता-पिता को नियंत्रण
टेक कंपनियों का तर्क है कि सरकार को प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए, बल्कि माता-पिता को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नियंत्रण देने की शक्ति प्रदान करनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रतिबंध लगाने से बच्चे इंटरनेट के उन अंधेरे कोनों में चले जाएंगे, जहां उन पर नजर रखना और भी मुश्किल होगा। मेटा अब अपने ‘टीन अकाउंट्स’ को बढ़ावा दे रहा है, जहां माता-पिता को अधिक नियंत्रण मिलता है। ब्रसेल्स के रेलवे स्टेशनों पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर भी कंपनियां सोशल मीडिया के खिलाफ सख्त कानूनों का विरोध कर रही हैं।
डिजिटल फेयरनेस एक्ट से टेक कंपनियों को खतरा
टेक कंपनियों की असली चिंता यूरोपीय संघ के प्रस्तावित डिजिटल फेयरनेस एक्ट को लेकर है। यह कानून अनंत स्क्रॉलिंग, ऑटो-प्ले वीडियो और एल्गोरिदम आधारित सुझाव जैसी सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा सकता है। इससे प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन और व्यापार मॉडल में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। यूरोपीय आयोग की उपभोक्ता नीति निदेशक इसाबेल पेरिग्नॉन ने संकेत दिया है कि इस विधेयक पर साल के अंत तक मतदान हो सकता है।
- टेक कंपनियां प्रतिबंध को रोकने के लिए भारी लॉबिंग कर रही हैं।
- यूरोपीय संघ में लॉबिंग पर पिछले साल 151 मिलियन यूरो खर्च किए गए।
- कंपनियां प्रतिबंध के बजाय माता-पिता को नियंत्रण देने की वकालत कर रही हैं।
- डिजिटल फेयरनेस एक्ट से प्लेटफॉर्म्स के बिजनेस मॉडल पर गहरा असर पड़ सकता है।