इंस्टाग्राम पर किशोरों की सुरक्षा पर बड़ा खुलासा, मेटा के आंतरिक सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। अमेरिका में चल रहे एक संघीय मुकदमे के दौरान पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, 13 से 15 वर्ष की उम्र के लगभग 19 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं ने स्वीकार किया कि उन्हें प्लेटफॉर्म पर ऐसी आपत्तिजनक या यौन तस्वीरें देखने को मिलीं, जिन्हें वे देखना नहीं चाहते थे। यह जानकारी मेटा के एक आंतरिक सर्वेक्षण से उजागर हुई है, जिसे अदालत में सार्वजनिक किया गया।

2021 के सर्वेक्षण से मिले आंकड़े

मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन के मुताबिक, यह आंकड़ा 2021 में इंस्टाग्राम उपयोगकर्ताओं पर किए गए एक सर्वेक्षण पर आधारित है। यह सर्वेक्षण किसी विशेष पोस्ट की सीधी जांच नहीं था, बल्कि उपयोगकर्ताओं के अनुभवों को समझने के लिए किया गया था। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 13 से 15 वर्ष के लगभग 8 प्रतिशत किशोरों ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर किसी को खुद को नुकसान पहुंचाते या ऐसा करने की धमकी देते हुए देखा। ये आंकड़े प्लेटफॉर्म पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

मेटा की रणनीति में किशोरों का महत्वपूर्ण स्थान

अदालत में पेश किए गए एक अन्य दस्तावेज से पता चलता है कि मेटा के शोधकर्ता किशोरों को अपने प्लेटफॉर्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपयोगकर्ता मानते थे। जनवरी 2021 के एक आंतरिक मेमो में एक शोधकर्ता ने सुझाव दिया था कि कंपनी को किशोरों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि वे अपने परिवार के लिए ‘उत्प्रेरक’ की तरह काम करते हैं। इसका मतलब यह है कि यदि एक किशोर किसी एप का उपयोग करता है, तो वह अपने माता-पिता और छोटे भाई-बहनों को भी इससे जोड़ने में सक्षम होता है। कंपनी का मानना था कि नए उपयोगकर्ताओं को प्राप्त करने और उन्हें बनाए रखने के लिए बच्चों के माध्यम से पूरे परिवार तक पहुंचना एक बेहतरीन रणनीति है।

मेटा पर बढ़ता कानूनी दबाव

मेटा प्लेटफॉर्म्स, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम का मालिक है, पर दुनिया भर में आरोप लग रहे हैं कि उसके प्लेटफॉर्म युवा उपयोगकर्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। अमेरिका में कंपनी के खिलाफ हजारों मुकदमे दायर किए गए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि मेटा ने जानबूझकर अपने एप्स को इस तरह डिजाइन किया है कि वे नशे की तरह लत लगाने वाले हों, जिससे नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच रहा है।

इन आरोपों के जवाब में इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी का तर्क है कि अधिकांश आपत्तिजनक सामग्री निजी संदेशों के माध्यम से भेजी जाती है। उनके अनुसार, कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे सुरक्षा के नाम पर लोगों के निजी संदेश नहीं पढ़ सकते, क्योंकि इससे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता का उल्लंघन होगा।

बढ़ते दबाव के बीच मेटा ने नीतियों में किए बदलाव

बढ़ते दबाव को देखते हुए मेटा ने 2025 के अंत में अपनी नीतियों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। कंपनी ने अब एआई द्वारा तैयार की गई आपत्तिजनक या यौन सामग्री को पूरी तरह से हटाने का वादा किया है, बशर्ते वह चिकित्सा या शैक्षिक उद्देश्य के लिए न हो। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है कि कंपनी सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रही है और इसे और बेहतर बनाने के लिए काम जारी है।

दुनिया भर में सोशल मीडिया पर सख्ती बढ़ी

इस बीच, दुनिया के कई देशों ने सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर सख्त कानून बनाने शुरू कर दिए हैं। कुछ प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं:

  • दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट एक्ट लागू किया, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • डेनमार्क की संसद ने नवंबर 2025 में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध लगाने का समझौता किया। हालांकि, 13-14 साल के बच्चों को माता-पिता की अनुमति से छूट देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
  • जनवरी 2025 में फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का विधेयक पारित किया।
  • मलेशियाई सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म्स के लिए 16 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है।
  • स्पेन ने भी 16 साल से कम उम्र के नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस बंद करने की योजना की घोषणा की है।
  • ग्रीस और स्लोवेनिया भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का विधेयक ला सकते हैं।
  • नॉर्वे में सोशल मीडिया के लिए सहमति की उम्र 13 से बढ़ाकर 15 करने का प्रस्ताव रखा गया है।

भारत में भी उठे सवाल

भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 में बच्चों और किशोरों में बढ़ती सोशल मीडिया की लत पर चिंता व्यक्त की गई है। सर्वेक्षण में सोशल मीडिया एप्स के लिए उम्र के हिसाब से सीमाएं तय करने और प्लेटफॉर्म्स को सख्त नियम लागू करने की सिफारिश की गई है। यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में गंभीर चिंता है, और सरकारें इसे लेकर सख्त कदम उठा रही हैं।