एआई और जीवविज्ञान का संगम: स्वास्थ्य सेवा में क्रांति की संभावना

बायोकॉन की अध्यक्ष किरण मजूमदार-शॉ ने हाल ही में एक प्रमुख एआई सम्मेलन में अपने विचार रखते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैविक बुद्धिमत्ता का सम्मिलन चिकित्सा विज्ञान के भविष्य को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है। उनके अनुसार, यह मिलन केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवा की पूरी अवधारणा को नया रूप देगा।

पूर्वानुमान और पुनर्जनन: स्वास्थ्य सेवा का नया प्रतिमान

मजूमदार-शॉ ने समझाया कि आने वाले समय में एआई और बायोलॉजी का तालमेल ‘प्रेडिक्टिव हेल्थकेयर’ यानी बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचानने और ‘रीजेनरेटिव साइंस’ यानी क्षतिग्रस्त ऊतकों को पुनर्जीवित करने जैसी अवधारणाओं को वास्तविकता में बदल देगा। यह दृष्टिकोण इलाज को अस्पतालों की चारदीवारी से निकालकर आम जनता के बीच ले जाएगा, जहां बीमारी को फैलने से पहले ही रोका जा सकेगा।

मानव शरीर: एक कुशल डेटा केंद्र

उन्होंने एक रोचक तुलना पेश की। उनके अनुसार, हमारा जैविक तंत्र एक अत्यधिक कुशल डेटा सेंटर की तरह काम करता है, जो न्यूनतम ऊर्जा खर्च करके जटिल जानकारियों को प्रोसेस करता है। इसके विपरीत, वर्तमान एआई सिस्टम को संचालित करने के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। मजूमदार-शॉ ने कहा, “प्रकृति ने हमें एक ऐसा सिस्टम दिया है जो कम ऊर्जा में बहुत कुछ कर सकता है। एआई को बायोलॉजी से सीखना चाहिए कि कैसे एक साथ कई काम करते हुए ऊर्जा की बचत की जाती है।”

कैंसर कोशिकाओं को स्वस्थ बनाना: एक सपना साकार होने की ओर

चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक कोशिकाओं के व्यवहार को बदलना रहा है। मजूमदार-शॉ ने इसे चिकित्सा की ‘होली ग्रिल’ करार दिया। उन्होंने बताया कि एआई की मदद से भविष्य में कैंसर जैसी घातक बीमारियों का इलाज संभव हो सकेगा, जहां खतरनाक कोशिकाओं को फिर से प्रोग्राम करके स्वस्थ कोशिकाओं में बदला जा सकेगा। यह खोज इलाज के तरीके को पूरी तरह बदल देगी।

डीएनए में छिपा ज्ञान: प्रकृति का अद्भुत पाठ

प्रवासी पक्षियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उनके डीएनए में पीढ़ियों का संचित ज्ञान मौजूद होता है। यह ज्ञान उन्हें बिना किसी बाहरी मार्गदर्शन के हजारों मील का सफर तय करने में सक्षम बनाता है। उनका कहना था कि एआई के बिना जीवविज्ञान के इन गूढ़ रहस्यों को समझना संभव नहीं होगा।

भारत के लिए नेतृत्व का अवसर

मजूमदार-शॉ ने इस क्षेत्र में भारत की विशेष स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अपने डेटा को साझा करने में हिचकिचाते हैं, लेकिन भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) पूरी तरह से खुला और पारदर्शी है।

  • भारत के पास विशाल और खुला डेटा नेटवर्क है।
  • यह डेटा स्वास्थ्य सेवा में नए मॉडल विकसित करने के लिए सोने की खान है।
  • अगर इस डेटा का सही उपयोग किया जाए, तो भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि एआई और जीवविज्ञान का यह अभूतपूर्व संगम दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक शक्तिशाली बदलाव लाएगा और भारत इस परिवर्तन का केंद्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।