एआई के जरिए वैज्ञानिक क्षेत्र में भारत बन सकता है वैश्विक नेता: गूगल डीपमाइंड प्रमुख
गूगल डीपमाइंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेमिस हसाबिस ने भारत की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा है कि देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दम पर वैज्ञानिक खोजों में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बोलते हुए हसाबिस ने भारतीय शिक्षा और नवाचार प्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप इकोसिस्टम में जो ऊर्जा और जुनून दिखता है, वह अद्वितीय है।
मजबूत क्षेत्रों में एआई को बनाएं ताकत का साधन
हसाबिस ने सुझाव दिया कि भारत को अपनी मौजूदा ताकत वाले क्षेत्रों पर और अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके अनुसार, एआई को इन क्षेत्रों में एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे देश अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को और मजबूत कर सके। उन्होंने कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि एआई की मदद से फसलों की सहनशक्ति (क्रॉप रेजिलिएंस) बढ़ाई जा सकती है और उत्पादन को बेहतर बनाया जा सकता है।
इसके अलावा, उन्होंने रचनात्मक उद्योगों, खासकर बॉलीवुड में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। उनके मुताबिक, एआई-आधारित उपकरण कहानी कहने के नए तरीके विकसित करने और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने में सहायक हो सकते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई की अपार संभावनाएं हैं, जहां यह बीमारियों के निदान और उपचार में क्रांति ला सकता है।
सरकार के साथ साझेदारी को तैयार
डेमिस हसाबिस ने स्पष्ट किया कि गूगल डीपमाइंड भारत सरकार के साथ गहन सहयोग के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसी साझेदारी चाहती है, तो कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां कंपनी तकनीकी विशेषज्ञता और शोध सहायता प्रदान कर सकती है। यह सहयोग भारत में एआई के विकास को गति देने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित हो सकता है।
एजीआई पर हसाबिस का दृष्टिकोण
आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) के विकास पर बात करते हुए हसाबिस ने कहा कि उन्नत एआई सिस्टम भविष्य में वैज्ञानिक खोजों को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रणालियां बीमारियों, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक असमानता जैसी गंभीर वैश्विक समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकती हैं।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान एआई तकनीक अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची है जहां उसे पूर्ण एजीआई कहा जा सके। उनके अनुमान के अनुसार, एजीआई के शुरुआती रूप अगले पांच से सात वर्षों में देखने को मिल सकते हैं, जबकि पूरी तरह से विकसित एजीआई को आने में एक से दो दशक लग सकते हैं।
एआई से जुड़े जोखिमों पर चिंता
डेमिस हसाबिस ने एआई से जुड़े संभावित खतरों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए यह आवश्यक है कि मजबूत सुरक्षा उपाय (गार्डरेल्स) विकसित किए जाएं, ताकि बढ़ती क्षमता वाले एआई सिस्टम मानवता के हित में काम करें और किसी भी तरह के दुरुपयोग से बचा जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिम्मेदारी और सुरक्षा के साथ एआई का विकास ही भविष्य में सफलता की कुंजी होगी।