साइबर धोखाधड़ी पर लगाम: सरकार का बैंकों में MuleHunter AI लागू करने पर जोर
देश में डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के साथ ही साइबर अपराध के मामलों में भी भारी इजाफा हुआ है। फर्जी बैंक खातों के जरिए आम नागरिकों के अरबों रुपये ठगे जा रहे हैं, जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है। इस समस्या से निपटने के लिए अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने सभी बैंकों से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विकसित MuleHunter AI सिस्टम को तुरंत अपनाने की अपील की है। सरकार का मानना है कि यह उपकरण बैंकिंग प्रणाली में सक्रिय फर्जी खातों के जाल को तोड़ने में कारगर साबित होगा।
क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?
आम बोलचाल में म्यूल यानी खच्चर का इस्तेमाल सामान ढोने के लिए किया जाता है। ठीक इसी प्रकार, साइबर अपराध की दुनिया में म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग अवैध लेन-देन में किया जाता है। ये खाते या तो पूरी तरह से फर्जी दस्तावेजों पर खोले जाते हैं या फिर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित किए जा रहे होते हैं। इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है। चूंकि इन खातों से जुड़ी जानकारी सत्य नहीं होती, इसलिए इन्हें ट्रैक करना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
MuleHunter AI: एक क्रांतिकारी तकनीक
MuleHunter AI एक उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित सॉफ्टवेयर है, जिसे दिसंबर 2024 में RBI की सहायक संस्था, रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) द्वारा लॉन्च किया गया था। इसका प्रमुख उद्देश्य बैंकों में मौजूद संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स की तुरंत पहचान करना है। साइबर अपराधी इन्हीं खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसों को इधर-उधर करने के लिए करते हैं। आरबीआई गवर्नर ने पहले ही यह दावा किया था कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से हर महीने लगभग 20,000 फर्जी या संदिग्ध खातों की पहचान की जा रही है। अब केंद्र सरकार चाहती है कि सभी बैंक इस तकनीक को अपनाएं, जिससे यह आंकड़ा और बढ़े और साइबर ठगी के मामलों में तेजी से कमी आए। शुरुआत में इसे 20 बैंकों में लागू करने की योजना थी, लेकिन अब इसके व्यापक स्तर पर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।
कैसे काम करता है MuleHunter AI?
MuleHunter AI को विशाल डेटा सेट पर प्रशिक्षित किया गया है। यह सिस्टम बैंक खातों की गतिविधियों और लेन-देन के पैटर्न का गहन विश्लेषण करता है। सॉफ्टवेयर को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह सामान्य और संदिग्ध खातों के व्यवहार में अंतर कर सके। यह तकनीक उन विशिष्ट संकेतों और पैटर्न को पहचानती है जो आमतौर पर म्यूल अकाउंट्स में देखे जाते हैं। जैसे ही कोई संदिग्ध लेन-देन या गतिविधि सामने आती है, सिस्टम तुरंत उसे चिह्नित कर देता है, जिससे बैंक समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं और ठगी को रोका जा सकता है।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष ध्यान
चूंकि यह सॉफ्टवेयर आरबीआई के तत्वावधान में ही विकसित किया गया है, इसलिए इसमें डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। इसमें मजबूत सुरक्षा विशेषताएं जोड़ी गई हैं, जिससे बाहरी हमलों या डेटा के दुरुपयोग की संभावना बेहद कम हो जाती है। सरकार को उम्मीद है कि सभी बैंकों द्वारा इस AI टूल को अपनाने के बाद साइबर धोखाधड़ी के मामलों में भारी गिरावट आएगी और आम जनता की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखा जा सकेगा।