UGC का सख्त रुख: AI से लिखी पीएचडी थीसिस पर बड़ी कार्रवाई, कई छात्र प्रभावित
शोध के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग पर अब लगाम लगने लगी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने कई पीएचडी थीसिस को खारिज करते हुए सख्त कदम उठाया है। ये वे थीसिस थीं, जिनमें AI टूल्स से प्राप्त सामग्री को बिना उचित संदर्भ के सीधे कॉपी-पेस्ट कर दिया गया था। UGC की जांच में पाया गया कि इनमें से कई शोध प्रबंधों में 40 प्रतिशत से अधिक सामग्री AI-जनरेटेड थी, जो शैक्षणिक बेईमानी की श्रेणी में आती है।
कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा मामला बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU), मुजफ्फरपुर से जुड़ा है। UGC को जब इन थीसिस की समीक्षा के दौरान संदेह हुआ, तो विशेष जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि शोधार्थियों ने ChatGPT जैसे AI प्लेटफॉर्म से सामग्री निकालकर सीधे अपनी थीसिस में डाल दी थी। न तो वह सामग्री मौलिक थी और न ही उसे उचित रूप से उद्धृत किया गया था। यह शैक्षणिक जगत में धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला माना गया।
UGC की सख्त चेतावनी और नए नियम
UGC ने न केवल सभी संदिग्ध थीसिस को वापस लौटा दिया है, बल्कि संबंधित छात्रों को इन्हें पूरी तरह से पुनः लिखने का निर्देश भी दिया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए UGC ने थीसिस जांच की प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है। अब हर थीसिस की जांच के लिए प्लेजरिज्म डिटेक्शन सॉफ्टवेयर का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, AI से जनरेटेड कंटेंट को भी 2018 के प्लेजरिज्म नियमों के तहत ही देखा जाएगा। यानी, बिना स्वीकारोक्ति के AI का उपयोग करना अब पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
हिंदी और अंग्रेजी थीसिस की जांच में अंतर
जांच में एक दिलचस्प पहलू सामने आया है। AI से की गई नकल ज्यादातर अंग्रेजी भाषा में लिखी गई थीसिस में पकड़ी गई। इसका मुख्य कारण यह है कि वर्तमान में उपलब्ध एंटी-प्लेजरिज्म सॉफ्टवेयर अंग्रेजी भाषा में साहित्यिक चोरी को अधिक सटीकता से पकड़ पाते हैं। वहीं, हिंदी भाषा के लिए यह जांच प्रणाली अभी उतनी मजबूत और प्रभावी नहीं है। शिक्षकों का मानना है कि हिंदी में प्लेजरिज्म जांच की तकनीक को बेहतर बनाने पर काम चल रहा है। UGC के पास देशभर के विश्वविद्यालयों से प्राप्त थीसिस का एक केंद्रीय डेटाबेस है, जिसकी मदद से इस तरह की गड़बड़ियों का पता लगाया जा रहा है।
शोध में AI का सही उपयोग कैसे करें?
UGC ने स्पष्ट किया है कि शोध में AI टूल्स का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसका उपयोग पारदर्शी और नैतिक तरीके से होना चाहिए। यदि किसी शोधार्थी ने अपने काम में AI की मदद ली है, तो उसे थीसिस में इसका स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा। बिना स्रोत बताए AI से सामग्री लेना अब साहित्यिक चोरी की श्रेणी में माना जाएगा। यह कदम शैक्षणिक ईमानदारी को बनाए रखने और शोध की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।