बजट 2026: आईटी क्षेत्र को मिला बड़ा उपहार, विदेशी क्लाउड कंपनियों को 2047 तक कर-मुक्ति

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने हेतु एक बड़ी घोषणा की है। इस प्रस्ताव के तहत, जो विदेशी क्लाउड कंपनियां भारत में स्थित डेटा सेंटर के माध्यम से वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करेंगी, उन्हें वर्ष 2047 तक पूर्ण कर छूट का लाभ मिलेगा। इसका तात्पर्य है कि इन कंपनियों को अगले 21 वर्षों तक कोई कर नहीं देना होगा। यह निर्णय देश में डेटा सेंटर और क्लाउड क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।

कैसे काम करेगी यह कर छूट?

इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन जैसी वैश्विक क्लाउड कंपनियों को भारत में अपनी सेवाओं का संचालन स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है। कर लाभ प्राप्त करने के लिए, इन कंपनियों को अपनी क्लाउड सेवाओं को भारतीय डेटा सेंटर से संचालित करना होगा और उन्हें किसी भारतीय इकाई के माध्यम से उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यह कदम न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा, बल्कि भारत को एक क्षेत्रीय क्लाउड हब के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।

सेफ हार्बर नियम का प्रावधान

वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशी कंपनियों को भारतीय ग्राहकों को सेवाएं देने के लिए एक भारतीय पुनर्विक्रेता या भागीदार के माध्यम से कार्य करना होगा। इसके अतिरिक्त, यदि डेटा सेंटर सेवा प्रदान करने वाली कंपनी उसी समूह से संबंधित है, तो उस पर लागत का 15 प्रतिशत ‘सेफ हार्बर’ नियम लागू किया जाएगा। यह राशि अधिकतम 2000 करोड़ रुपये तक हो सकती है। यह नियम कर गणना में पारदर्शिता और सरलता लाएगा।

यह फैसला क्यों है महत्वपूर्ण?

वैश्विक डेटा सेंटर बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। अनुमान है कि यह बाजार 2026 में 430 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 1.1 ट्रिलियन डॉलर का हो जाएगा। इस अवधि में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वृद्धि होने की संभावना है। ऐसे में सरकार द्वारा 2047 तक कर-तटस्थ क्लाउड हब के रूप में भारत को प्रस्तुत करना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इससे भारत वैश्विक डेटा सेंटर निवेश के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को भी राहत

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए कर संरचना में बदलाव का भी संकेत दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों को संग्रहीत करने वाली विदेशी कंपनियों को 2 प्रतिशत लाभ मार्जिन पर सेफ हार्बर प्रदान किया जाएगा। इससे प्रभावी कर दर लगभग 0.7 प्रतिशत ही रह जाएगी, जो विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत है।

भारत में डेटा सेंटर निवेश में तेजी

पिछले छह महीनों में भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों के साथ-साथ टाटा समूह, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी समूह और ग्रीनको समूह जैसी भारतीय कंपनियां भी इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से निवेश कर रही हैं। 2025 में डेटा सेंटर से संबंधित निवेश प्रस्ताव 75 अरब डॉलर को पार कर चुके हैं। हाल ही में, केंद्रीय आईटी मंत्री ने बताया कि फरवरी में होने वाले वैश्विक AI शिखर सम्मेलन के दौरान AI बुनियादी ढांचे, विशेषकर डेटा सेंटर में निवेश दोगुना होने की संभावना है। यह सरकार की इस रणनीति को और मजबूती प्रदान करेगा।