मेटा ने भारत सरकार को चुकाया 5,993 करोड़ रुपये का आयकर, व्हाट्सएप की नीति बनी चिंता का कारण
सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा ने खुलासा किया है कि उसने वर्ष 2025 के दौरान भारत सरकार को 5,993 करोड़ रुपये (लगभग 652 मिलियन डॉलर) का आयकर अदा किया है। कंपनी के अनुसार, यह राशि टैक्स रिफंड के समायोजन के बाद की शुद्ध भुगतान है। वैश्विक स्तर पर मेटा ने कुल 7.57 बिलियन डॉलर का कर चुकाया, जिसमें भारत का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा। यह आंकड़ा भारतीय डिजिटल बाजार के बढ़ते महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
नियामक और कानूनी चुनौतियों का सामना
कर भुगतान की जानकारी साझा करने के साथ ही मेटा ने भारत में अपनी कानूनी उलझनों का भी जिक्र किया है। कंपनी ने विशेष रूप से 2021 में लागू व्हाट्सएप गोपनीयता नीति का उल्लेख किया, जिसकी जांच अभी भी विभिन्न अदालतों और सरकारी विभागों में लंबित है। इसके अलावा, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और सर्वोच्च न्यायालय में फेसबुक और व्हाट्सएप के बीच डेटा साझाकरण को लेकर मामले चल रहे हैं। फिलहाल कंपनी इन फैसलों के खिलाफ अपील की प्रक्रिया में है।
भविष्य के वित्तीय परिणामों पर संभावित खतरा
मेटा ने चेतावनी दी है कि यदि उसे एक देश से दूसरे देश डेटा भेजने या अपने विभिन्न ऐप्स (जैसे फेसबुक और व्हाट्सएप) के बीच जानकारी साझा करने से रोका गया, तो कंपनी के लिए गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में कंपनी अपनी सेवाओं का उचित संचालन नहीं कर पाएगी और विज्ञापनों को लक्षित दर्शकों तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाएगा, जिससे उसकी आय में गिरावट आ सकती है।
सख्त नियमों का पालन न करने पर जुर्माने का जोखिम
कंपनी ने भारत और जर्मनी जैसे देशों के कड़े नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यदि वह आपत्तिजनक पोस्ट हटाने या जांच में पुलिस की सहायता करने जैसे नियमों का पालन नहीं करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लग सकता है या उसकी सेवाओं पर प्रतिबंध भी लग सकता है। मेटा को आशंका है कि भारत में चल रही कानूनी जांचें भविष्य में उसके कामकाज को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती हैं।
- मेटा ने 2025 में भारत सरकार को 5,993 करोड़ रुपये का आयकर चुकाया है।
- वैश्विक स्तर पर कंपनी ने कुल 7.57 बिलियन डॉलर का कर भुगतान किया।
- व्हाट्सएप की 2021 की गोपनीयता नीति की जांच विभिन्न अदालतों में जारी है।
- सी.सी.आई. और सर्वोच्च न्यायालय में डेटा साझाकरण से जुड़े मामले लंबित हैं।
- डेटा ट्रांसफर और ऐप्स के बीच सूचना साझाकरण पर रोक से कंपनी की आय प्रभावित हो सकती है।
- नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना या सेवाओं पर प्रतिबंध लगने का खतरा है।