दक्षिण कोरिया का एआई कानून: नए नियमों से स्टार्टअप्स में बेचैनी

दक्षिण कोरिया ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को विनियमित करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा लागू कर दिया है। सरकार इसे तकनीकी विकास में विश्वसनीयता सुनिश्चित करने वाला कदम बता रही है, जबकि स्टार्टअप्स इसके संभावित प्रभावों को लेकर आशंकित हैं। यह कानून दुनिया का पहला पूर्ण एआई नियामक तंत्र होने का दावा करता है, जिसका उद्देश्य तकनीक के सुरक्षित और जिम्मेदाराना उपयोग को बढ़ावा देना है।

क्या है नया कानूनी ढांचा?

दक्षिण कोरिया सरकार ने एआई के बढ़ते प्रभाव और इससे जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए यह कानून बनाया है। इसके तहत उन एआई सिस्टम्स पर मानवीय निगरानी अनिवार्य कर दी गई है, जिन्हें ‘उच्च प्रभाव वाली प्रणाली’ की श्रेणी में रखा गया है। इनमें परमाणु सुरक्षा, पेयजल उत्पादन, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय क्षेत्र जैसे क्रेडिट स्कोरिंग शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि इन क्षेत्रों में एआई की छोटी सी चूक भी बड़ी आपदा का कारण बन सकती है, इसलिए अंतिम निर्णय में मनुष्य का हस्तक्षेप आवश्यक है।

एआई कंटेंट पर लेबलिंग जरूरी

नए कानून के अनुसार, कंपनियों को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वे उच्च जोखिम वाले या जनरेटिव एआई का उपयोग कर रही हैं। यदि एआई द्वारा निर्मित सामग्री को वास्तविक जानकारी या मानव निर्मित सामग्री से अलग पहचानना मुश्किल है, तो उस पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। इस नियम का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 30 मिलियन वॉन (लगभग 18 लाख रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य भ्रामक या फर्जी एआई सामग्री से आम जनता की रक्षा करना है।

स्टार्टअप्स की चिंता

हालांकि सरकार इस कानून को एआई विकास में बाधा नहीं बल्कि सुरक्षा कवच बता रही है, लेकिन स्टार्टअप समुदाय इससे पूरी तरह सहमत नहीं है। उनका कहना है कि कानून की कई धाराएं अस्पष्ट हैं, जिससे कंपनियां जोखिम से बचने के लिए नवाचार से पीछे हट सकती हैं। स्टार्टअप्स को डर है कि इससे नई तकनीकों के प्रयोग और विकास की गति धीमी पड़ जाएगी। वे चाहते हैं कि नियमों में अधिक स्पष्टता लाई जाए, ताकि वे बिना किसी भय के नए प्रयोग कर सकें।

अन्य देशों में एआई कानून

दुनिया भर में एआई को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग देशों ने अलग-अलग रणनीति अपनाई है:

  • यूरोपीय संघ: यूरोपीय संघ ने 2024 में एआई एक्ट का प्रस्ताव रखा था, जिसे 2027 तक पूरी तरह लागू करने की योजना है। इसके तहत उच्च जोखिम वाले एआई मॉडलों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और कुछ अस्वीकृत एआई पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
  • चीन: चीन ने जनरेटिव एआई (जैसे फोटो और वीडियो बनाने वाले एआई) के लिए सख्त नियम बनाए हैं। इनमें एआई सामग्री पर लेबलिंग अनिवार्य की गई है।
  • अमेरिका: अमेरिका में अभी तक एआई को विनियमित करने वाला कोई विशेष कानून पारित नहीं हुआ है। हालांकि, व्हाइट हाउस के आदेश पर सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिनके तहत सरकारी एजेंसियों द्वारा एआई मॉडल का परीक्षण करने के बाद ही उन्हें आम जनता के लिए जारी किया जाता है।
  • भारत: भारत में एआई विनियमन के लिए कोई विशेष कानून नहीं है, लेकिन डिजिटल इंडिया एक्ट के तहत इस पर काम चल रहा है। फिलहाल एआई को मौजूदा आईटी एक्ट के तहत नियंत्रित किया जा रहा है।

मोहलत का प्रावधान

दक्षिण कोरिया के विज्ञान और आईसीटी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कानून एआई के विकास को रोकने के लिए नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए लाया गया है। कंपनियों को राहत देते हुए सरकार ने यह भी घोषणा की है कि नियमों के उल्लंघन पर सजा लागू होने से पहले कम से कम एक साल की मोहलत दी जाएगी। इस दौरान व्यवसाय नए नियमों के अनुसार खुद को ढाल सकेंगे।