अमेजन पर सामान हुआ महंगा, ट्रंप के टैरिफ का असर साफ; सीईओ ने दी यह वजह

दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन पर अब उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एंडी जेसी ने इसका सीधा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) को बताया है। दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान एक साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि बढ़ती लागत के कारण विक्रेता अब अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने को मजबूर हैं।

पुराना स्टॉक खत्म, अब दिख रहा है टैरिफ का प्रभाव

एंडी जेसी ने बताया कि अमेजन और उसके साथ काम करने वाले तीसरे पक्ष के विक्रेताओं ने 2025 की शुरुआत में बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा कर लिया था। इस रणनीति का उद्देश्य ग्राहकों पर टैरिफ के तत्काल प्रभाव को कम करना और कीमतों को स्थिर रखना था। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि अब वह पुराना स्टॉक समाप्त हो चुका है। इसके चलते नए आयात पर लागू होने वाले शुल्क का असर सीधे तौर पर कीमतों में नजर आने लगा है। जेसी ने समझाया कि खुदरा कारोबार में मुनाफे का मार्जिन बहुत पतला होता है। यदि लागत में 10 प्रतिशत की भी वृद्धि होती है, तो कंपनियों के लिए इसे अपने ऊपर लेना संभव नहीं होता, जिसके परिणामस्वरूप कीमतें बढ़ जाती हैं।

जब ट्रंप ने जेफ बेजोस को किया था फोन

यह मुद्दा अप्रैल 2025 में तब चर्चा में आया था, जब खबरें आईं कि अमेजन अपने प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की कीमत के पास यह दिखाने की योजना बना रहा है कि उसमें टैरिफ के कारण कितनी अतिरिक्त लागत जुड़ी है। इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस को फोन किया था। बाद में ट्रंप ने इस बातचीत को ‘अच्छी कॉल’ बताते हुए कहा था कि बेजोस ने इस मसले को जल्दी सुलझा लिया।

व्हाइट हाउस ने बताया था ‘शत्रुतापूर्ण कदम’

उस समय व्हाइट हाउस ने अमेजन की इस योजना को एक ‘शत्रुतापूर्ण और राजनीतिक कदम’ करार दिया था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट और वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक ने इसकी कड़ी आलोचना की थी। लटनिक का कहना था कि 10 प्रतिशत के टैरिफ से कीमतों में कोई बड़ा अंतर नहीं आएगा, और इसका असर केवल उन वस्तुओं पर होगा जो अमेरिका में निर्मित नहीं होतीं। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने चीन से आयात होने वाले उत्पादों पर 145 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाया है, जबकि अन्य देशों पर न्यूनतम 10 प्रतिशत टैरिफ लागू है। अब 2026 में अमेजन के सीईओ के इस बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि इन आयात शुल्कों का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ना शुरू हो गया है।