स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां: कई बीमारियां हुईं खत्म, कुछ खत्म होने के कगार पर
देहरादून में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की प्रगति का मूल आधार उसके नागरिकों की अच्छी सेहत है। जब स्वास्थ्य बेहतर होगा, तभी आर्थिक विकास संभव होगा और उत्पादकता में वृद्धि होगी। यही कारण है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
बदलाव की ओर: रोकथाम पर जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में स्वास्थ्य नीति के ढांचे में अहम बदलाव किए गए। पहले की सोच ‘बीमार पड़ो, फिर इलाज कराओ’ पर आधारित थी, लेकिन अब सरकार का ध्यान निवारक स्वास्थ्य (प्रिवेंटिव हेल्थ) पर केंद्रित है। सरकार अब उन उपायों को प्राथमिकता दे रही है जो बीमारी के खतरे को पहले ही कम कर दें। चाहे वह दीर्घकालिक (क्रॉनिक) बीमारियां हों या मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, हर दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है।
कई बीमारियों पर मिली विजय
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गर्व से कहा कि भारत ने अपने व्यापक और समर्पित प्रयासों से कई गंभीर बीमारियों पर पूरी तरह से विजय प्राप्त कर ली है, जबकि कुछ अन्य बीमारियों से मुक्त होने की अंतिम सीढ़ी पर खड़ा है।
पोलियो मुक्त भारत की सफलता
भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था और यह उपलब्धि आज भी कायम है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 2 करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं, जो एक बड़ी आबादी है। सभी नवजात बच्चों को पल्स पोलियो की मुफ्त खुराक उपलब्ध कराकर देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी पोलियो के मामले सामने आए हैं, लेकिन भारत जैसे विशाल देश में एक दशक से अधिक समय से पोलियो का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
कालाजार, ट्रेकोमा और लेप्रोसी पर नियंत्रण
पोलियो के अलावा, कालाजार रोग पर भी भारत जीत हासिल करने के बेहद करीब है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से इस संबंध में प्रमाणपत्र मिलने में केवल एक वर्ष का समय शेष है। इसके अतिरिक्त, भारत को मई 2015 में ही मातृ और नवजात टेटनस (Neonatal Tetanus) से मुक्त घोषित किया जा चुका है। ट्रेकोमा (आंखों का संक्रमण) अब देश के लिए चिंता का विषय नहीं रह गया है, और कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) पर भी विजय प्राप्त करने की दिशा में भारत अंतिम चरण में है।
प्रमुख बीमारियों के बारे में समझें
- पोलियो: यह पोलियोवायरस के कारण होने वाली अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है और स्थायी लकवा का कारण बन सकती है। बच्चों में इसका खतरा सबसे अधिक होता है।
- मातृ और नवजात टेटनस: यह क्लोस्ट्रीडियम टेटानी बैक्टीरिया से होने वाली एक घातक बीमारी है। यह मुख्य रूप से अस्वच्छ परिस्थितियों में प्रसव और गर्भनाल को गंदे उपकरणों से काटने के कारण होती थी।
- ट्रेकोमा: यह आंखों का एक संक्रमण है, जो ‘क्लेमाइडिया ट्रैकोमैटिस’ नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह पलकों और कॉर्निया को प्रभावित करता है और स्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है।
- लेप्रोसी (कुष्ठ रोग): यह माइकोबैक्टीरियम लेप्री बैक्टीरिया से होने वाला एक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से त्वचा, नसों और आंखों को प्रभावित करता है।
यह जानकारी चिकित्सकीय रिपोर्टों और विशेषज्ञों से बातचीत पर आधारित है। किसी भी बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।