विश्व किडनी कैंसर दिवस 2026: किडनी कैंसर और गुर्दे की बीमारियों से जुड़े भ्रम और सच्चाई
किडनी का कैंसर आज के समय में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। दुनिया भर में हर साल लाखों लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह दुनिया का 14वां सबसे आम कैंसर है, जिसके हर वर्ष लगभग 4.34 लाख नए मामले सामने आते हैं और करीब 1.55 लाख लोगों की मौत हो जाती है। पुरुषों, बुजुर्गों और विकसित देशों में रहने वालों में इसका प्रकोप अधिक देखा जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय रहते इस बीमारी की पहचान हो जाए तो सर्जरी और थेरेपी जैसे उपचारों से मरीज की जान बचाई जा सकती है। लेकिन दुर्भाग्य से, अधिकतर मामलों का पता अंतिम चरणों में ही चलता है, जब इलाज मुश्किल हो जाता है। इसका एक बड़ा कारण लोगों में फैली गलत धारणाएं और अधूरी जानकारियां हैं। आइए, किडनी कैंसर से जुड़े ऐसे ही कुछ आम मिथकों की सच्चाई जानते हैं।
मिथ: किडनी का कैंसर केवल बुजुर्गों को होता है
यह सच है कि उम्र बढ़ने के साथ किडनी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि युवा इससे पूरी तरह सुरक्षित हैं। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि 50 वर्ष से कम आयु के लगभग एक तिहाई लोगों में भी इस बीमारी के विकसित होने का जोखिम हो सकता है।
खराब जीवनशैली, शराब का सेवन, धूम्रपान की आदत, कैंसर का पारिवारिक इतिहास या पहले से मौजूद किडनी की कोई बीमारी युवाओं को भी इस गंभीर रोग का शिकार बना सकती है। इसलिए उम्र के आधार पर इस बीमारी को नजरअंदाज करना गलत है।
मिथ: पेशाब में खून आने का मतलब ही किडनी कैंसर है
पेशाब का रंग और उसकी जांच शरीर की कई बीमारियों के बारे में संकेत दे सकती है। यदि पेशाब में खून दिखाई दे या उसका रंग बरगंडी जैसा हो जाए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि, हर बार ऐसा होने का मतलब कैंसर नहीं होता है।
मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई), गुर्दे में पथरी या अन्य संक्रमणों के कारण भी पेशाब में खून आ सकता है। फिर भी, यदि यह समस्या लगातार बनी रहे तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है, ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके।
मिथ: महिलाओं को किडनी कैंसर का खतरा अधिक होता है
किडनी का कैंसर किसी भी लिंग या उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में इसका जोखिम महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुना है। इसका एक कारण पुरुषों में धूम्रपान और कार्यस्थल पर कैंसर पैदा करने वाले रसायनों के संपर्क में अधिक आना हो सकता है।
हालांकि, जिन महिलाओं को बार-बार मूत्र मार्ग या योनि में संक्रमण होता रहता है, उन्हें अपनी किडनी की सेहत की नियमित जांच कराते रहना चाहिए। लिंग के आधार पर इस बीमारी को कम आंकना सही नहीं है।
मिथ: शराब से सिर्फ लिवर कैंसर होता है, किडनी को कोई खतरा नहीं
यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि शराब का सेवन लिवर के साथ-साथ किडनी के लिए भी बेहद हानिकारक है। अल्कोहल पूरे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और किडनी कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ा देता है।
इसी तरह, धूम्रपान भी किडनी कैंसर के खतरे को लगभग दोगुना कर देता है। शोध बताते हैं कि ये दोनों आदतें पुरुषों में किडनी कैंसर के लगभग 30% और महिलाओं में लगभग 25% मामलों के लिए जिम्मेदार होती हैं।
किडनी कैंसर के प्रति जागरूकता क्यों जरूरी है?
किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षणों में पेशाब में खून आना, कमर या पेट के एक तरफ लगातार दर्द रहना, अचानक वजन कम होना, थकान और बुखार शामिल हो सकते हैं। अक्सर ये लक्षण सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
समय पर जांच और सही जानकारी ही इस जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे कारगर तरीका है। मिथकों पर विश्वास करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना ही बेहतर विकल्प है।
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी पाठकों की जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से है। किसी भी बीमारी के निदान या उपचार के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।