केरल में संक्रामक बीमारियों का बढ़ता प्रकोप: निपाह और शिगेला से कितना खतरा?
केरल में पिछले कुछ हफ्तों से संक्रामक बीमारियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। निपाह वायरस और शिगेला बैक्टीरिया के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने इन बीमारियों की मौजूदा स्थिति और सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
शिगेला संक्रमण: कितने मामले और कितनी मौतें?
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, चालू महीने में शिगेला संक्रमण के 70 नए मामले सामने आए हैं। इस साल अब तक कुल 146 मरीजों में इस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस बीमारी से अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है। शिगेला एक जीवाणु संक्रमण है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के माध्यम से फैलता है। यह पेट और आंतों को प्रभावित करता है, जिससे गंभीर दस्त, बुखार और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
निपाह वायरस: वेंटिलेटर पर मरीज, सरकार अलर्ट पर
निपाह वायरस का खतरा भी टला नहीं है। कोझिकोड में एक 43 वर्षीय व्यक्ति में निपाह संक्रमण की पुष्टि हुई थी, जो एन्सेफलाइटिस के लक्षणों के साथ सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हुआ था। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अब तक प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए 38 से अधिक नमूनों में से केवल यह एक ही व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया है। फिलहाल यह मरीज वेंटिलेटर पर है और उसकी हालत में पांच दिनों के बाद मामूली सुधार देखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण थे, और अब स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में है।
स्वास्थ्य मंत्री की अपील और रोकथाम के उपाय
केरल के स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस साल निपाह वायरस को फैलने से रोकने में सक्षम रहेगी। उन्होंने बताया कि वायरल और अमीबिक बीमारियों की रोकथाम के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सलाहकार डॉ. एस.एस. लाल कर रहे हैं। यह समिति हर हफ्ते बैठक करेगी और स्थिति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देगी। साथ ही, यह समिति ऐसी बीमारियों को स्थायी रूप से रोकने के तरीकों पर भी शोध करेगी।
संक्रमण की रोकथाम के लिए स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मचारी और खाद्य सुरक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। दूषित पानी और भोजन के स्रोतों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि साफ पीने के पानी को लेकर कई शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। नदियों और अन्य जलस्रोतों की सफाई को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कई बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके। फिलहाल राज्य में हैजा (कॉलरा) का कोई मामला सामने नहीं आया है।
प्रमुख बीमारियों को समझें: शिगेला, वेस्ट नाइल और निपाह
केरल में इन दिनों तीन प्रमुख संक्रामक बीमारियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। इनके बारे में जानना जरूरी है:
- शिगेला संक्रमण: यह एक जीवाणु जनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलती है। यह आंतों को प्रभावित करती है और गंभीर दस्त का कारण बनती है। यह संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से भी फैल सकता है।
- वेस्ट नाइल वायरस: यह एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। यह दिमागी बुखार (एन्सेफलाइटिस) या मेनिन्जाइटिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
- निपाह वायरस: यह एक जूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, फल खाने वाले चमगादड़ इसके मुख्य वाहक माने जाते हैं। इसके लक्षण हल्के बुखार से शुरू होते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में यह मस्तिष्क में संक्रमण (एन्सेफलाइटिस) का कारण बन सकता है। निपाह वायरस से मृत्यु दर 40% से 75% तक हो सकती है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है।
केरल सरकार इन बीमारियों से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है और लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। स्वास्थ्य विभाग लोगों से साफ-सफाई का ध्यान रखने और किसी भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की अपील कर रहा है।