कैंसर कोशिकाओं को जन्म से पहले ही खत्म करेगी यह नई वैक्सीन

कैंसर का नाम सुनते ही मन में डर और बेचैनी छा जाती है। दुनिया भर में हर साल लाखों लोग इस गंभीर बीमारी की चपेट में आते हैं, और करोड़ों जिंदगियां इसकी वजह से अधूरी रह जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में होने वाली हर छह मौतों में से लगभग एक मौत का कारण कैंसर ही है। चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र के लोग भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान ने लगातार नई दवाओं और तकनीकों के जरिए इलाज को आसान बनाया है। सर्वाइकल और लिवर कैंसर से बचाव के लिए पहले से टीके उपलब्ध हैं। अब वैज्ञानिकों ने दो और खतरनाक कैंसरों के खिलाफ एक क्रांतिकारी वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है, जो कैंसर कोशिकाओं को शरीर में पनपने ही नहीं देगी।

क्या है यह चमत्कारी वैक्सीन?

शोधकर्ता एक ऐसी वैक्सीन पर काम कर रहे हैं, जिसे ‘लिंचवैक्स’ (LynchVax) नाम दिया गया है। यह कोई सामान्य टीका नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य कैंसर बनने की प्रक्रिया को शुरू होने से पहले ही रोकना है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को इस तरह प्रशिक्षित करेगी कि वह असामान्य कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें शुरुआती चरण में ही खत्म कर दे, इससे पहले कि वे कैंसर का रूप ले सकें। खास बात यह है कि यह टीका बाउल (कोलोरेक्टल) कैंसर और ओवेरियन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के जोखिम को कम करने में सक्षम हो सकता है।

किन लोगों पर होगा ट्रायल?

इस वैक्सीन का परीक्षण खासतौर पर उन लोगों पर किया जाएगा जो ‘लिंच सिंड्रोम’ नामक आनुवंशिक स्थिति से पीड़ित हैं। लिंच सिंड्रोम एक ऐसी आनुवंशिक समस्या है, जिसमें व्यक्ति में कई प्रकार के कैंसर होने का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इनमें मुख्य रूप से पेट या आंत का कैंसर (कोलोरेक्टल) और गर्भाशय का कैंसर (एंडोमेट्रियल) शामिल है। यह जोखिम जीन में म्यूटेशन के कारण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलता है।

आंकड़ों के अनुसार, अकेले इंग्लैंड में लगभग 1.75 लाख लोग इस सिंड्रोम से प्रभावित हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 5 प्रतिशत लोगों (करीब 10 हजार) को ही अपनी इस समस्या के बारे में पता है। यह वैक्सीन ऐसे लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है।

कैसे काम करेगी यह वैक्सीन?

यह परीक्षण ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना के सहयोग से किया जाएगा। प्रतिभागियों को ‘mRNA-4194’ नाम की वैक्सीन दी जाएगी। इसके बाद वैज्ञानिक यह जांचेंगे कि प्रतिरक्षा प्रणाली कैसी प्रतिक्रिया देती है, कौन सी खुराक सबसे प्रभावी है और क्या यह पूरी तरह से सुरक्षित है। इस अध्ययन का दूसरा चरण 2027 में शुरू होने की संभावना है, जिसमें ब्रिटेन के कई चिकित्सा केंद्र शामिल होंगे।

इस वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य शरीर को यह सिखाना है कि कौन सी कोशिकाएं भविष्य में कैंसर में बदल सकती हैं। लिंच सिंड्रोम वाले लोगों में समय के साथ कोशिकाओं के अंदर कई तरह के म्यूटेशन होते रहते हैं, जो उन्हें कैंसर में बदलने की आशंका बढ़ा देते हैं। अच्छी बात यह है कि इन बदलावों को प्रतिरक्षा प्रणाली पहचान सकती है। अगर इम्यून सिस्टम को सही तरीके से प्रशिक्षित किया जाए, तो वह इन असामान्य कोशिकाओं पर हमला करके उन्हें कैंसर बनने से पहले ही खत्म कर सकता है।

शोधकर्ताओं का क्या कहना है?

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कैंसर रिसर्च यूके के वरिष्ठ प्रोफेसर डेविड चर्च का कहना है कि लिंच सिंड्रोम वाले लोगों में जीवनभर कैंसर का खतरा बना रहता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि किसी महिला को पहले गर्भाशय में कैंसर हुआ और कुछ साल बाद उसे बाउल कैंसर हो गया। प्रोफेसर चर्च के अनुसार, इस वैक्सीन के लिए जिन जैविक लक्ष्यों को चुना गया है, वे लिंच सिंड्रोम से जुड़े कई तरह के कैंसरों में समान रूप से पाए जाते हैं। यदि यह वैक्सीन सफल रहती है, तो यह एक साथ कई प्रकार के कैंसरों से सुरक्षा दे सकती है।

भविष्य के लिए क्या मायने रखता है यह शोध?

अगर यह साबित हो जाता है कि प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से जुड़ी आनुवंशिक गड़बड़ियों को पहचानने और उनके खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है, तो यह तरीका दूसरे प्रकार के कैंसरों की रोकथाम में भी कारगर साबित हो सकता है। अब तक ज्यादातर कैंसर का इलाज तब शुरू होता है जब बीमारी सामने आ चुकी होती है, लेकिन यह वैक्सीन पहली बार कैंसर को बनने से पहले ही रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी, जो लाखों लोगों की जान बचा सकती है।