स्तन कैंसर: बच्चे पैदा करने में देरी से बढ़ रहा है खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
स्तन कैंसर के मामले दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी का शिकार हो जाती हैं। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय कैंसर सम्मेलन में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। इस सम्मेलन में बताया गया कि महिलाओं की जीवनशैली और उनके कुछ निजी फैसले स्तन कैंसर के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।
स्तन कैंसर के मामले अब सिर्फ बुजुर्ग महिलाओं तक सीमित नहीं हैं। युवा महिलाओं में भी यह बीमारी तेजी से फैल रही है। स्तन में गांठ, निप्पल से असामान्य स्राव या स्तन के आकार और त्वचा के रंग में बदलाव इसके सामान्य लक्षण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आनुवंशिकता के साथ-साथ खराब दिनचर्या और अनियमित खान-पान ने इस बीमारी के खतरे को और बढ़ा दिया है।
बच्चे पैदा करने में देरी और कैंसर का खतरा
आज की आधुनिक जीवनशैली में महिलाएं शिक्षा, करियर और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देती हैं। इस वजह से वे मातृत्व को अक्सर बाद के वर्षों के लिए टाल देती हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह देरी शरीर की प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इटली के एक प्रमुख अस्पताल में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. एंड्रिया डेसेंसी का कहना है कि आजकल महिलाएं पहले की तुलना में बहुत देर से बच्चे पैदा करने का फैसला ले रही हैं, जिसके नकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
डॉ. डेसेंसी के अनुसार, देर से गर्भधारण करना स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों के सबसे बड़े कारणों में से एक है। उन्होंने कहा कि लोग इस विषय पर खुलकर बात करने से बचते हैं, लेकिन यह एक गंभीर समस्या है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में युवाओं में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।
बच्चे पैदा करने की सही उम्र क्या है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि कम उम्र में बच्चे पैदा करने से ओवेरियन और स्तन कैंसर से बचाव में मदद मिल सकती है। डॉ. डेसेंसी के अनुसार, जैविक रूप से महिलाएं अपने पहले मासिक धर्म के तुरंत बाद गर्भधारण के लिए तैयार हो जाती हैं। बच्चे पैदा करने का सबसे उपयुक्त समय 20 से 35 वर्ष के बीच माना जाता है। इसके बाद न केवल गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है, बल्कि स्तन कैंसर का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस जोखिम के बारे में महिलाओं को न तो ज्यादा जानकारी है और न ही इस पर पर्याप्त बातचीत होती है।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. डेसेंसी कहते हैं कि एक समाज के रूप में हम अब देर से बच्चे पैदा कर रहे हैं। पढ़ाई, काम और रहने-सहने का खर्च, इन सभी का प्रभाव इस बात पर पड़ता है कि महिलाएं कब बच्चे पैदा करती हैं या बिल्कुल भी करती हैं या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जीवनशैली से जुड़े कारण जैसे शारीरिक गतिविधि में कमी, खराब खान-पान और मोटापा भी कैंसर के बढ़ते मामलों में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
प्रजनन, हार्मोन और स्तन कैंसर के बीच संबंधों को समझने पर पता चलता है कि कम उम्र में बच्चा होना कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि जब तक महिला गर्भधारण नहीं करती, तब तक स्तन की कोशिकाएं अपेक्षाकृत अपरिपक्व और संवेदनशील रहती हैं। ये कोशिकाएं एस्ट्रोजन हार्मोन के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, जिससे उनके असामान्य रूप से बढ़ने और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। जब गर्भधारण सही समय पर होता है, तो ये कोशिकाएं जल्दी परिपक्व होकर अपने प्राकृतिक कार्य (दूध उत्पादन) की ओर बढ़ जाती हैं, जिससे कैंसर बनने का जोखिम कम हो सकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
एक प्रतिष्ठित ब्रिटिश जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं का पहला बच्चा 30 वर्ष की उम्र के बाद होता है, उनमें मेनोपॉज से पहले स्तन कैंसर होने का खतरा उन महिलाओं की तुलना में 60% तक अधिक पाया गया है, जिन्होंने लगभग 22 वर्ष की उम्र में पहला बच्चा किया था। इसके अलावा, हर गर्भधारण के साथ स्तन कैंसर का जोखिम लगभग 9% तक कम हो सकता है।
स्तनपान कराने को भी स्तन कैंसर के जोखिमों के खिलाफ सुरक्षात्मक माना गया है। शोध के अनुसार, यदि कोई महिला छह महीने से अधिक समय तक स्तनपान कराती है और धूम्रपान नहीं करती, तो इससे बीमारी के होने में लगभग 10 साल तक की देरी हो सकती है। स्तनपान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के उत्पादन को कम कर सकता है। चूंकि कैंसर कोशिकाएं एस्ट्रोजन पर निर्भर होकर बढ़ती हैं, इसलिए इसका स्तर कम होना जोखिम घटा सकता है।
स्तन कैंसर से बचाव के लिए ध्यान देने योग्य बातें
कैंसर एक जटिल बीमारी है और इसके जोखिम कई कारकों पर निर्भर करते हैं। समय पर बच्चे होना स्तन कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है, लेकिन यह एक बहुत ही व्यक्तिगत निर्णय है जो कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसके अलावा भी कई उपाय हैं जिनसे कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है।
- धूम्रपान से दूरी बनाए रखना
- वजन को नियंत्रण में रखना
- शराब के सेवन से बचना
- नियमित शारीरिक गतिविधि करना
- संतुलित और पौष्टिक आहार लेना
ये सभी उपाय आपको गंभीर जोखिमों से बचाए रखने में मदद कर सकते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह जानकारी केवल जागरूकता बढ़ाने के लिए है और किसी भी बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।