आलू खाने का तरीका बन सकता है डायबिटीज का कारण, शोध में हुआ बड़ा खुलासा
कुरकुरे फ्रेंच फ्राइज, गरमा-गरम समोसे या तले हुए पकौड़े—ये स्वाद हर किसी को लुभाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही स्वाद धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है? डीप फ्राई की गई चीजों को लंबे समय से सेहत के लिए हानिकारक माना जाता रहा है। इनमें कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, जिससे वजन बढ़ने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि का खतरा रहता है। साथ ही, इनमें मौजूद ट्रांस फैट हृदय स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय है।
हालांकि, एक नए शोध ने इस मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा है। जो लोग नियमित रूप से डीप फ्राई आलू का सेवन करते हैं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ सकता है। यह आदत शरीर में कई बीमारियों को जन्म दे सकती है। आइए समझते हैं कि आखिर डीप फ्राई आलू और डायबिटीज के बीच क्या संबंध है।
डीप फ्राई आलू: डायबिटीज का बड़ा जोखिम कारक
बीएमजे जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, आलू अपने आप में नुकसानदायक नहीं है, बल्कि उसे पकाने का तरीका सबसे अहम है। विशेष रूप से डीप फ्राई करके खाने से यह सेहत के लिए काफी हानिकारक हो जाता है। इस शोध में करीब 37 सालों तक (1984 से 2021) 2.05 लाख से अधिक लोगों पर निगरानी रखी गई। इन सभी की सेहत शुरू में अच्छी थी और किसी को भी पहले से डायबिटीज, हृदय रोग या कैंसर नहीं था। हर चार साल में उनके खान-पान की आदतों के बारे में विस्तृत जानकारी ली गई।
लंबे फॉलो-अप के दौरान कुल 22,299 लोगों में टाइप-2 डायबिटीज पाई गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि हफ्ते में तीन बार आलू खाने से डायबिटीज का खतरा लगभग 5% तक बढ़ जाता है। लेकिन जब आलू को पकाने के तरीके के आधार पर अलग-अलग विश्लेषण किया गया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे।
फ्रेंच फ्राइज का सेवन बढ़ा सकता है 20% तक खतरा
अध्ययन के अनुसार, हफ्ते में तीन बार डीप फ्राई आलू या फ्रेंच फ्राइज खाने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग 20% तक बढ़ जाता है। वहीं, उबले, बेक या मैश किए हुए आलू को हफ्ते में तीन बार खाने पर डायबिटीज के खतरे में कोई खास वृद्धि नहीं देखी गई।
इस अंतर को समझना जरूरी है। दरअसल, जब आलू को तेल में तला जाता है, तो उसमें कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है और उसकी रासायनिक संरचना भी बदल जाती है। यह बदलाव इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बन सकता है, जो टाइप-2 डायबिटीज का मुख्य कारण है। तलने की प्रक्रिया में आलू में मौजूद स्टार्च तेजी से ग्लूकोज में बदलता है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है।
साबुत अनाज का विकल्प चुनें, सफेद चावल से बचें
शोध में यह भी देखा गया कि आलू की जगह दूसरे कार्बोहाइड्रेट्स लेने पर क्या असर पड़ता है। अगर हफ्ते में तीन बार आलू की जगह साबुत अनाज जैसे ओट्स, क्विनोआ, ब्राउन राइस या मिलेट्स खाए जाएं, तो टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग 8% तक कम हो सकता है। वहीं, उबले या बेक किए आलू की जगह सफेद चावल खाने से डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल तले हुए खाने से बचना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि आप उसकी जगह क्या खा रहे हैं। साबुत अनाज में फाइबर अधिक होता है, जो ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाता है और इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
क्या आलू खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
आहार विशेषज्ञों के अनुसार, आलू को पूरी तरह से खाने से बचने की जरूरत नहीं है। बस कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- फ्रेंच फ्राइज, आलू के चिप्स और अत्यधिक तली हुई चीजों का सेवन कम करें।
- आलू को छिलके के साथ उबालना या बेक करना बेहतर विकल्प है, क्योंकि इससे फाइबर बरकरार रहता है।
- खाना बनाते समय बहुत कम तेल का इस्तेमाल करें या एयर फ्रायर का उपयोग करें।
- अपने भोजन में साबुत अनाज जैसे ओट्स, क्विनोआ, ब्राउन राइस और मिलेट्स को शामिल करें, ताकि शरीर में शुगर का प्रभाव धीरे-धीरे हो।
इस शोध से यह संदेश साफ है कि सेहत के लिए सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि उसे पकाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सही विकल्प चुनकर आप न केवल डायबिटीज के खतरे को कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी समग्र सेहत को भी बेहतर बना सकते हैं।