चिकित्सा जगत में बड़ी उपलब्धि: इंसान में पहली बार एक साथ लगा सुअर का लिवर और किडनी
अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। चीन के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी इंसान के शरीर में एक साथ सुअर का लिवर और दोनों किडनी प्रत्यारोपित करने में कामयाबी पाई है। यह केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है, जहां जानवरों के अंग इंसानों की जान बचाने में सक्षम हो सकते हैं।
दुनिया भर में हर साल लाखों लोग किडनी, लिवर, हृदय और अन्य अंगों की कमी के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। अंगदान की प्रतीक्षा सूची लंबी है और जरूरतमंदों को समय पर अंग नहीं मिल पाते। ऐसे में वैज्ञानिक लंबे समय से जानवरों, विशेषकर सुअरों के अंगों को इंसानों में सुरक्षित रूप से प्रत्यारोपित करने की संभावनाएं तलाश रहे थे।
पहला मल्टी-ऑर्गन जेनोट्रांसप्लांट
यह पहली बार नहीं है जब इंसान में सुअर का कोई अंग लगाया गया हो, लेकिन अब तक के सभी प्रयास केवल एक ही अंग तक सीमित थे। इस बार पहली बार एक साथ दो महत्वपूर्ण अंगों—लिवर और किडनी—को प्रत्यारोपित किया गया है। इस प्रक्रिया को ‘मल्टी-ऑर्गन पिग-टू-ह्यूमन ट्रांसप्लांट’ का नाम दिया गया है।
शोध पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रत्यारोपण एक 53 वर्षीय ब्रेन-डेड व्यक्ति पर किया गया, जिसके परिवार ने पहले ही इस शोध के लिए अपनी सहमति दे दी थी। डॉक्टरों की टीम ने जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर के अंगों को उस व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया।
कैसे काम करता है जेनोट्रांसप्लांटेशन?
जब एक प्रजाति के अंगों या ऊतकों को दूसरी प्रजाति में प्रत्यारोपित किया जाता है, तो इसे जेनोट्रांसप्लांटेशन कहते हैं। सुअर के अंग इंसानों के लिए इसलिए उपयुक्त माने जाते हैं क्योंकि उनके अंगों का आकार और कार्यप्रणाली मानव अंगों से काफी मिलती-जुलती है। हालांकि, शरीर द्वारा विदेशी अंग को अस्वीकार करने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसी समस्या को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने सुअर के डीएनए में जेनेटिक बदलाव किए, ताकि इंसान की प्रतिरक्षा प्रणाली उन अंगों पर हमला न करे।
प्रत्यारोपण के बाद के परिणाम
सर्जरी के बाद डॉक्टर लगातार मरीज की स्थिति पर नजर रखे हुए थे। शुरुआती 24 घंटों में अंगों के अस्वीकार होने के कोई संकेत नहीं मिले। इसके विपरीत, प्रत्यारोपित अंगों ने लगभग पांच दिनों तक बेहतर ढंग से काम किया।
- लिवर का प्रदर्शन: प्रत्यारोपण के 19 घंटे के भीतर ही सुअर का लिवर पित्त रिलीज करने लगा, जो इस बात का संकेत था कि वह सामान्य रूप से कार्य कर रहा है।
- किडनी का प्रदर्शन: मरीज के शरीर में क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर, जो किडनी की बीमारी के कारण बढ़ा हुआ था, दोनों किडनी लगाए जाने के बाद सामान्य स्तर पर लौट आया। यह साबित करता है कि प्रत्यारोपित किडनी भी प्रभावी रूप से काम कर रही थी।
यह सफलता क्यों है खास?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही समय में कई अंगों का प्रत्यारोपण तकनीकी रूप से कहीं अधिक जटिल होता है और इसमें जोखिम भी अधिक होते हैं। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर के अंग मानव शरीर में महत्वपूर्ण जैविक कार्य करने में सक्षम हो सकते हैं। यह बहु-अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, जो भविष्य में अंगों की भारी कमी को दूर करने में मदद कर सकता है।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि यह सफलता उत्साहजनक है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अभी और अध्ययन की आवश्यकता है। जीवित मरीजों पर इस तकनीक का उपयोग करने से पहले ब्रेन-डेड व्यक्तियों और जीवित बंदरों पर और अधिक परीक्षण किए जाने चाहिए।
एक और महत्वपूर्ण चिंता यह है कि सुअर के अंगों के माध्यम से कोई वायरस या बैक्टीरिया इंसानों में न पहुंचे। इसके लिए सख्त जैव-सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। फिर भी, इस प्रयोग ने दुनिया भर के उन लाखों मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है, जो अंगों की कमी के कारण जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं।