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इबोला संकट: अफ्रीका में हालात गंभीर, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार चिंता बढ़ा रहा है। कांगो और यूगांडा इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) के अनुसार, इन दोनों देशों में अब तक कुल 1,198 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 128 पुष्ट और 1,077 संदिग्ध मामले शामिल हैं। इसके साथ ही लगभग 228 संदिग्ध मौतें भी दर्ज की गई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस बढ़ते खतरे पर लगातार नजर बनाए हुए है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यूगांडा ने कांगो के साथ अपनी सीमा बंद करने का फैसला किया है।

अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के बीच भारत में भी इबोला को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। हाल ही में देश में दो संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से एक बेंगलुरु और दूसरा गुजरात में है। इन मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है। एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध यात्रियों की मॉनिटरिंग की जा रही है। फिलहाल राहत की बात यह है कि भारत में अब तक इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है।

अफ्रीका सीडीसी ने भारत का जताया आभार

इबोला संकट के बीच एक बार फिर भारत ने वैश्विक मददगार की भूमिका निभाई है। कोविड महामारी के दौरान ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ का तमगा हासिल करने वाले भारत ने अब प्रभावित अफ्रीकी देशों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सहायता भेजी है। अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने इस मदद के लिए भारत सरकार और जनता का धन्यवाद किया है।

अफ्रीका सीडीसी ने बताया कि भारत ने जरूरी डायग्नोस्टिक्स, थेरेप्यूटिक्स, संक्रमण रोकथाम के उपकरण और अन्य चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराई है। यह सामग्री यूगांडा और कांगो जैसे प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाई जा रही है, जिससे संक्रमितों की समय पर जांच और इलाज में मदद मिलेगी। भारत के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है।

भारत में संदिग्ध मामलों की स्थिति

देश में इबोला के दो संदिग्ध मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। पहला मामला बेंगलुरु का है, जहां यूगांडा की 28 वर्षीय एक महिला को संदेह के आधार पर आइसोलेशन में रखा गया था। हालांकि, जांच में उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। दूसरा मामला गुजरात का है, जहां 37 वर्षीय एक व्यक्ति अफ्रीका और बांग्लादेश की यात्रा करके मुंबई पहुंचा था। कुछ लक्षण दिखने पर उसे आइसोलेट कर दिया गया है। उसके सैंपल जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे भेजे गए हैं। रिपोर्ट 24 से 48 घंटों में आने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि भारत में अब तक इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैली महामारी के दौरान एकमात्र मामला 10 नवंबर 2014 को सामने आया था, जब लाइबेरिया से लौटे एक 26 वर्षीय भारतीय में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उसे सफलतापूर्वक आइसोलेट कर ठीक कर लिया गया था और देश में इसका कोई और मामला नहीं फैला था।

स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियां

स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रमण की रोकथाम के लिए कई कदम उठाए हैं। एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की टीमें प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों से सीधे संपर्क कर रही हैं। सतर्कता के तौर पर, जिन यात्रियों में हल्के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, उन्हें तुरंत आइसोलेशन में रखा जा रहा है। एक अधिकारी के अनुसार, अगर किसी यात्री को हल्का सिरदर्द भी है, तो कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा है और उसे आइसोलेट कर दिया जाता है। संदिग्ध मामलों के सैंपल जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे भेजे जा रहे हैं। फिलहाल देश में कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह से अलर्ट पर है।

रूस ने बनाई नई वैक्सीन

इबोला के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई विशेष टीका या दवा उपलब्ध नहीं है। इस बीच रूस ने एक बड़ी उपलब्धि का दावा किया है। रूसी स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने घोषणा की है कि वैज्ञानिकों ने इबोला के नए स्ट्रेन के खिलाफ एक वैक्सीन विकसित कर ली है। यह वैक्सीन यूगांडा और कांगो में फैल रहे प्रकोप के खिलाफ प्रभावी हो सकती है।

गमालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पहले भी घरेलू उपयोग के लिए वेक्टर-आधारित टीके (GamEvac-Combi और GamEvac-Lyo) पंजीकृत किए हैं। नई वैक्सीन को मौजूदा स्ट्रेन के खिलाफ 60 से 70 प्रतिशत तक सुरक्षात्मक बताया गया है। हालांकि, इस वैक्सीन की वैश्विक उपलब्धता और प्रभावशीलता पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

सावधानी की जरूरत

हालांकि भारत में अब तक इबोला का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण संक्रमण फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। स्वास्थ्य अधिकारी प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं और संदिग्ध मामलों को आइसोलेट किया जा रहा है। आम जनता को भी सलाह दी जाती है कि वे लक्षणों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

इबोला एक गंभीर बीमारी है, जिसमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा हो सकता है। फिलहाल भारत में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।

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