इबोला के बढ़ते खतरे: बंडिबुग्यो स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता, सरकार ने जारी की एडवाइजरी

दुनियाभर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए इबोला वायरस एक बार फिर से गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अफ्रीकी देशों कांगो और यूगांडा से शुरू हुए इस संक्रमण ने लोगों में दहशत फैला दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस के अनुसार, अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में इसका जोखिम काफी अधिक है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर अभी खतरा कम ही माना जा रहा है। इस प्रकोप में अब तक करीब 600 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 139 लोगों की जान जा चुकी है।

एशियाई देशों में फिलहाल इबोला का सीधा खतरा नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने भी एहतियाती कदम उठाए हैं। नई दिल्ली में 28 से 31 मई तक आयोजित होने वाले भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इस बीच, रविवार को केंद्र सरकार ने इबोला संक्रमण से बचाव के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसमें जरूरी सुझाव और दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

सरकार की एडवाइजरी: क्या कहा गया है?

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और यूगांडा में इबोला के तेजी से फैलने के मद्देनजर, डब्ल्यूएचओ ने 17 मई 2026 को इसे ‘अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित कर दिया था। इसके बाद 22 मई 2026 को डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन समिति ने सभी देशों को सलाह दी कि वे हवाई अड्डों और सीमाओं पर निगरानी बढ़ाएं। इसका मुख्य उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षणों वाले यात्रियों की जल्द से जल्द पहचान करना है।

भारत सरकार ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट कहा है कि जिन देशों में इबोला के मामले सामने आ रहे हैं, वहां यात्रा करने से बचा जाए। खासतौर पर कांगो, यूगांडा और उनसे सटे देशों, जैसे दक्षिण सूडान, में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है। अगर इन क्षेत्रों की कोई यात्रा योजना है, तो उसे तुरंत रद्द करने की सलाह दी गई है।

भारतीयों के लिए विशेष सलाह

सरकार ने उन भारतीय नागरिकों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो फिलहाल इन प्रभावित देशों में रह रहे हैं। उन्हें स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नियमों का सख्ती से पालन करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। गौरतलब है कि इबोला के मौजूदा प्रकोप के पीछे ‘बंडिबुग्यो स्ट्रेन’ को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

अच्छी बात यह है कि अब तक भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, यह बीमारी बेहद गंभीर है और इसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है। फिलहाल इस विशेष स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है।

भारत में अब तक केवल एक मामला

इबोला संक्रमण को पहली बार 1976 में अफ्रीका में देखा गया था। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में समय-समय पर फैलता रहा है। भारत में अब तक के इतिहास में केवल एक ही व्यक्ति इस बीमारी से संक्रमित पाया गया है।

साल 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैले वैश्विक इबोला संकट के दौरान, 10 नवंबर 2014 को यह एकमात्र मामला सामने आया था। लाइबेरिया से लौटे एक 26 वर्षीय भारतीय नागरिक में दिल्ली हवाई अड्डे पर स्क्रीनिंग के दौरान संक्रमण की पुष्टि हुई थी। हालांकि, उसे तुरंत आइसोलेट कर इलाज दिया गया और वह सफलतापूर्वक ठीक हो गया था। उसके बाद देश में इस संक्रमण का कोई अन्य मामला सामने नहीं आया।

कैसे फैलता है यह जानलेवा वायरस?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला संक्रमितों की मृत्यु दर कई बार 50 प्रतिशत या उससे भी अधिक देखी गई है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से फैलता है।

शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करना शुरू कर देता है। गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सबसे खतरनाक संक्रमणों में से एक मानते हैं और इससे बचाव के लिए लगातार जागरूकता फैला रहे हैं।

  • इबोला से बचाव के लिए प्रभावित देशों की यात्रा से बचें।
  • यदि आप संक्रमित क्षेत्र में हैं, तो स्थानीय स्वास्थ्य नियमों का पालन करें।
  • बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
  • हवाई अड्डों और सीमाओं पर स्वास्थ्य जांच में सहयोग करें।