तमिलनाडु की राजनीति में चर्चित ज्योतिषी: कौन हैं राधन पंडित?
तमिल सुपरस्टार से मुख्यमंत्री बने विजय थलापति की राजनीतिक पारी इन दिनों देशभर में सुर्खियों में है। इसी बीच एक और नाम तेजी से उभरकर सामने आया है – राधन पंडित वेट्रिवेल। विजय सरकार में उन्हें विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) नियुक्त किया गया था, लेकिन विवाद उत्पन्न होने पर यह नियुक्ति रद्द कर दी गई। अब लोग जानना चाहते हैं कि यह राधन पंडित कौन हैं, तमिलनाडु की राजनीति से उनका क्या जुड़ाव रहा है, और वे विजय के इतने करीबी कैसे बने।
राधन पंडित वेट्रिवेल की पृष्ठभूमि
राधन पंडित तमिलनाडु के प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिषी और अंकशास्त्री (न्यूमरोलॉजिस्ट) माने जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें ज्योतिष और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का चार दशकों से अधिक का अनुभव है। वे स्वयं को आध्यात्मिक गुरु और ध्यान प्रशिक्षक के रूप में पेश करते हैं। उनकी पहचान केवल एक ज्योतिषी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे तमिल राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली आध्यात्मिक सलाहकार के रूप में जाने जाते हैं।
जयललिता और अन्य बड़े नेताओं से संबंध
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राधन पंडित 1989-90 के दौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के सलाहकारों में शामिल रहे थे। इसके अलावा, उनका नाम भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के करीबी आध्यात्मिक सलाहकारों में भी लिया जाता है। यही कारण है कि तमिल राजनीति में उनकी पहुंच और प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है।
विजय के राजनीतिक सफर में प्रवेश
जब विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम (टीवीके) की स्थापना की, तभी से राधन पंडित उनके नजदीकी सलाहकार के रूप में देखे जाने लगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने विजय की कुंडली और अंकशास्त्र के आधार पर पार्टी के नाम और राजनीतिक निर्णयों को लेकर सलाह दी थी। यहां तक कि विजय के शपथ ग्रहण समारोह के लिए शुभ समय तय करने में भी उनकी भूमिका बताई जाती है। चुनावी रणनीति से लेकर मुहूर्त तय करने तक, वे विजय के भरोसेमंद सलाहकार माने जाते हैं।
चुनावी भविष्यवाणी और बढ़ी चर्चा
राधन पंडित तब सबसे ज्यादा सुर्खियों में आए जब उन्होंने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की जीत की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने विजय की राजनीतिक कुंडली को ‘सुनामी जैसी ताकत’ वाला बताया था। चुनाव परिणाम आने के बाद यह भविष्यवाणी सटीक साबित हुई, जिससे सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उनकी चर्चा और तेज हो गई।
ओएसडी नियुक्ति और विवाद
हाल ही में विजय सरकार ने राधन पंडित को मुख्यमंत्री कार्यालय में राजनीतिक मामलों का विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) नियुक्त किया था। इस फैसले के बाद विपक्षी दलों और कुछ सहयोगी नेताओं ने सवाल उठाए कि एक ज्योतिषी को सरकारी पद क्यों दिया गया। टीवीके समर्थकों का तर्क था कि वे केवल ज्योतिषी नहीं, बल्कि राजनीतिक सलाहकार और पार्टी प्रवक्ता की भूमिका भी निभाते रहे हैं। हालांकि, लगातार उठ रहे सवालों और विवाद के बाद पार्टी को अपना फैसला वापस लेना पड़ा और उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई।
राजनीति में ज्योतिष का प्रभाव
राधन पंडित का मामला एक बार फिर भारतीय राजनीति में ज्योतिष और आध्यात्मिक सलाहकारों के प्रभाव को उजागर करता है। तमिलनाडु में लंबे समय से नेताओं के साथ ज्योतिषियों और आध्यात्मिक गुरुओं का जुड़ाव देखा जाता रहा है। यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक ज्योतिषी राजनीतिक निर्णयों और सरकारी नियुक्तियों में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है, और कैसे ऐसे फैसले जनता और विपक्ष के बीच विवाद का कारण बन सकते हैं।