चैत्र नवरात्रि 2026: आज सातवां दिन, जानिए किस माता की होती है पूजा

चैत्र नवरात्रि के पवन दिन अपने समापन की ओर हैं। 19 मार्च से शुरू हुआ यह पर्व 26 मार्च को समाप्त होगा। ऐसे में भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि आज नवरात्रि का कौन सा दिन है और किस देवी की आराधना की जाती है। खासकर 25 मार्च को लेकर कई लोग असमंजस में हैं कि इस दिन कौन सी तिथि है और किस माता का पूजन करना चाहिए। साथ ही, अष्टमी व्रत को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रहती है कि यह 25 मार्च को रखा जाएगा या 26 मार्च को।

यदि आप भी इन्हीं प्रश्नों के उत्तर ढूंढ रहे हैं, तो यह लेख आपकी सभी शंकाओं का समाधान करेगा। आइए जानते हैं कि 25 मार्च 2026 को नवरात्रि का कौन सा दिन है और इस दिन किस देवी की उपासना का विधान है।

25 मार्च 2026: नवरात्रि का सातवां दिन

आज चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। यह दिन विशेष रूप से मां कालरात्रि को समर्पित होता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा के इस उग्र स्वरूप की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि मां कालरात्रि सभी प्रकार के भय, नकारात्मक शक्तियों और जीवन में आने वाली बाधाओं को नष्ट करती हैं। नवरात्रि के सातवें दिन मां की आराधना करने से भक्तों को साहस, अपार शक्ति और सुरक्षा का वरदान प्राप्त होता है।

मां कालरात्रि का स्वरूप और महत्व

मां कालरात्रि मां दुर्गा का सबसे उग्र और भयानक रूप माना जाता है। उनका वर्ण काला है, बाल बिखरे हुए हैं और उनके तीन नेत्र हैं। वह गधे की सवारी करती हैं। उनके गले में बिजली की सी चमक वाली माला है और चार भुजाओं में से दो में खड्ग (तलवार) और कांटा धारण किया हुआ है। मां कालरात्रि की उपासना से भक्तों को कई लाभ प्राप्त होते हैं:

  • भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।
  • शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
  • साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • तंत्र-मंत्र और बुरी शक्तियों के प्रभाव का नाश होता है।

मां कालरात्रि का प्रिय भोग

मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अत्यंत प्रिय है। ऐसा माना जाता है कि माता को गुड़ अर्पित करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। आप माता के सामने गुड़ से बनी खीर या हलवे का भोग लगा सकते हैं।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने का सरल और प्रभावी तरीका इस प्रकार है:

  • प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र को एक चौकी पर स्थापित करें।
  • माता को रोली, अक्षत (चावल), फूल और गुड़ का भोग अर्पित करें।
  • विधि-विधान से दीपक और धूप जलाएं।
  • मां के मंत्रों का जाप करें।
  • अंत में मां की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

मां कालरात्रि की आरती

जय कालरात्रि माता, जय महाकाली।
काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्टों का नाश करने वाली,
भक्तों की रक्षा करने वाली॥
अंधकार को दूर भगाती,
संकट सब हरने वाली॥
जय कालरात्रि माता, जय महाकाली॥