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परम एकादशी 2026: तीन वर्षों में एक बार आने वाला यह विशेष व्रत, जानें पूजन विधि और नियम

हिंदू पंचांग में अधिकमास का आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक बताया गया है। इस पवित्र मास में आने वाली एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परम एकादशी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 11 जून को रखा जाएगा। विशेष बात यह है कि यह एकादशी हर तीन साल में केवल एक बार आती है, जिससे इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं इसकी संपूर्ण पूजा विधि और आवश्यक नियम।

परम एकादशी व्रत और पूजन की विधि

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद पूजा स्थल पर शांत मन से बैठकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

अब एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। गंगाजल मिश्रित जल से भगवान का अभिषेक करें और पीले चंदन से तिलक लगाएं।

इसके पश्चात भगवान को पीले पुष्प, फल और तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है, अतः उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

पूजा के दौरान इन मंत्रों का करें उच्चारण

“एकादश्यां निराहारः स्थित्वाहमपरेऽहनि, भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत।”

इसके बाद धूप-दीप प्रज्वलित करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। पूरे दिन उपवास रखें और केवल एक बार फलाहार ग्रहण करें। इस दिन दिन में सोना वर्जित माना गया है। रात्रि में भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और विष्णु चालीसा का पाठ करते हुए जागरण करना अत्यंत शुभ होता है।

द्वादशी के दिन व्रत का पारण

अगले दिन द्वादशी तिथि पर सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का दूध से अभिषेक करें। इसके बाद इस मंत्र का जप करें:

“अज्ञानतिमिरान्धस्य व्रतेनानेन केशव, प्रसीद सुमुखो भूत्वा ज्ञानदृष्टिप्रदो भव।”

इसके पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य दें और ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। अपनी क्षमता अनुसार दान-दक्षिणा दें। अंत में स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

एकादशी व्रत के आवश्यक नियम

  • एकादशी का व्रत केवल एक दिन का नहीं होता, बल्कि इसके नियम दशमी तिथि से ही शुरू हो जाते हैं।
  • दशमी की रात को हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए।
  • एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना वर्जित माना गया है।
  • व्रती के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस नियम का पालन करना चाहिए।

अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए संबंधित माध्यम उत्तरदायी नहीं है।

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