अप्रैल 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत: तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इसे संध्या काल में किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और कई प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है। खासतौर पर वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियों से राहत मिलती है और रिश्तों में मिठास बढ़ती है। ज्योतिष के अनुसार, इस व्रत से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और शांति का अनुभव होता है। आइए जानते हैं कि वैशाख माह का यह महत्वपूर्ण व्रत कब रखा जाएगा।

वैशाख माह के प्रदोष व्रत की तिथि

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल 2026 को शाम 6 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 29 अप्रैल 2026 को रात 7 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। यह अप्रैल महीने का आखिरी प्रदोष व्रत होगा।

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

  • पूजा का समय: शाम 06 बजकर 54 मिनट से 09 बजकर 04 मिनट तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 17 मिनट से 05 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन पूजा की एक निश्चित विधि होती है, जिसका पालन करने से व्रत का पूर्ण लाभ मिलता है। पूजा की विधि इस प्रकार है:

  • सबसे पहले शिवलिंग पर जल से अभिषेक करें और उसके बाद गंगाजल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, आक के फूल, शमी के पत्ते और धतूरा चढ़ाएं।
  • चंदन का तिलक लगाएं और “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • महादेव को अनाज अर्पित करें, इससे धन-धान्य में वृद्धि होती है।
  • सफेद मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाएं।
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें, इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।

प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से बहुत महत्व है। इस व्रत को रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही, कुंडली के विभिन्न दोष शांत होते हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। इस व्रत के प्रभाव से मनचाहा जीवनसाथी मिलना, प्रेम जीवन में सुख, नौकरी में तरक्की और अन्य मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रदोष काल में की गई उपासना विशेष रूप से शुभ मानी जाती है और इससे साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।