आईआईटी मद्रास से 12 देशों के 46 विद्यार्थियों ने प्राप्त की डिग्री
भारतीय उच्च शिक्षा का वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव अब साफ देखा जा सकता है। जहां एक ओर भारतीय छात्र विदेशों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुनिया भर के विद्यार्थी भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई करना पसंद कर रहे हैं। इसी कड़ी में आईआईटी मद्रास ने एक बार फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत किया है।
हाल ही में संपन्न एक समारोह में 12 विभिन्न देशों के 46 छात्रों को स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें अमेरिका, सोमालिया, सूडान, नेपाल, अफगानिस्तान, युगांडा, तंजानिया और कैमरून जैसे देशों के विद्यार्थी शामिल हैं। इन छात्रों ने एमटेक, एमए और एमएससी जैसे पाठ्यक्रमों में अपनी पढ़ाई पूरी की है।
दीक्षांत समारोह में विदेश सचिव की उपस्थिति
आईआईटी मद्रास में आयोजित इस विशेष दीक्षांत समारोह में विदेश सचिव विक्रम मिसरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने सभी छात्रों को डिग्री प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर छात्रों के परिजन भी मौजूद रहे। अपने संबोधन में विदेश सचिव ने तकनीकी क्षेत्र में आ रहे तेज बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और टिकाऊ बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में हो रही प्रगति को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने लागोस, अक्रा और काहिरा जैसे शहरों को उभरते स्टार्टअप केंद्रों के रूप में पहचान दिलाई।
भारतीय शिक्षा की बढ़ती स्वीकार्यता
भारतीय शिक्षा प्रणाली की वैश्विक स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस सत्र में भारत के पहले विदेशी कैंपस आईआईटी जांजीबार से भी चार छात्र स्नातक हुए हैं। इसके अलावा, 17 देशों के लगभग 150 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पोस्ट-ग्रेजुएशन और पीएचडी कार्यक्रमों के लिए चुना गया है। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारत का शैक्षणिक क्षेत्र वैश्विक मंच पर तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।